55 Surah Ar-Rahmaan

55 सूरए रहमान -दूसरा रूकू

55|26|كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ
55|27|وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
55|28|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|29|يَسْأَلُهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ
55|30|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|31|سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ الثَّقَلَانِ
55|32|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|33|يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ إِنِ اسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا مِنْ أَقْطَارِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ فَانفُذُوا ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَانٍ
55|34|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|35|يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِّن نَّارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنتَصِرَانِ
55|36|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|37|فَإِذَا انشَقَّتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَالدِّهَانِ
55|38|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|39|فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُسْأَلُ عَن ذَنبِهِ إِنسٌ وَلَا جَانٌّ
55|40|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|41|يُعْرَفُ الْمُجْرِمُونَ بِسِيمَاهُمْ فَيُؤْخَذُ بِالنَّوَاصِي وَالْأَقْدَامِ
55|42|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
55|43|هَٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتِي يُكَذِّبُ بِهَا الْمُجْرِمُونَ
55|44|يَطُوفُونَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ حَمِيمٍ آنٍ
55|45|فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ

ज़मीन पर जितने हैं सब को फ़ना है(1){26}
(1) हर जानदार वगै़रह हलाक होने वाला है.

और बाक़ी है तुम्हारे रब की ज़ात अज़मत और बुज़ुर्गी वाला(2){27}
(2) कि वह सृष्टि के नाश के बाद उन्हें ज़िन्दा करेगा और हमेशा की ज़िन्दगी अता करेगा और ईमानदारों पर लुत्फ़ो करम करेगा.

तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे {28} उसी के मंगता हैं जितने आसमानों और ज़मीन में हैं(3)
(3) फ़रिश्ते हों या जिन्न या इन्सान या और कोई प्राणी, कोई भी उससे बेनियाज़ नहीं. सब उसकी मेहरबानी के मोहताज हैं और हर सूरत में उसकी बारगाह में सवाली.

उसे हर दिन एक काम है (4) {29}
(4) यानी वह हर वक़्त अपनी क़ुदरत के निशान ज़ाहिर फ़रमाता है किसी को रोज़ी देता है, किसी को मारता है, किसी को जिलाता है, किसी को इज़्ज़त देता है, किसी को ज़िल्लत, किसी को ग़नी करता है, किसी को मोहताज, किसी के गुनाह बख़्शता है, किसी की तकलीफ़ दूर करता है. कहा गया है कि यह आयत यहूदियों के रद में उतरी जो कहते थे कि अल्लाह तआला सनीचर के दिन कोई काम नहीं करता. उनके क़ौल का खुला रद फ़रमाया गया. कहते हैं कि एक बादशाह ने अपने वज़ीर से इस आयत के मानी पूछे. उसने एक दिन का समय मांगा और बड़ी चिन्ता और दुख की हालत में अपने मकान पर आया. उसके एक हब्शी ग़ुलाम ने वज़ीर को परेशान देखकर कहा ऐ मेरे मालिक आपको क्या मुसीबत पेश आई. वज़ीर ने बयान किया तो ग़ुलाम ने कहा कि इसके मानी मैं बादशाह को समझा दूंगा. वज़ीर ने उसको बादशाह के सामने पेश किया तो ग़ुलाम ने कहा ऐ बादशाह अल्लाह की शान यह है कि वह रात को दिन में दाख़िल करता है और दिन को रात में और मुर्दे से ज़िन्दा निकालता है और ज़िन्दा से मुर्दे को और बीमार को स्वास्थ्य देता है और स्वस्थ को बीमार करता है. मुसीबत ज़दा को रिहाई देता है और बेग़मों को मुसीबत में जकड़ता है. इज़्ज़त वालों को ज़लील करता है और ज़लीलों को इज़्ज़त देता है, मालदारों को मोहताज करता है, मोहताजों को मालदार, बादशाह ने ग़ुलाम का जवाब पसन्द किया और वज़ीर को हुक्म दिया कि ग़ुलाम को विज़ारत का ख़िलअत पहनाए, ग़ुलाम ने वज़ीर से कहा ऐ आक़ा यह भी अल्लाह की एक शान है.

तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओंगे {30} ज़ल्द सब काम निपटाकर हम तुम्हारे हिसाब का क़स्द फ़रमाते हैं ऐ दोनो भारी गिरोह (5){31}
(5) जिन्न व इन्स के.

तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे {32} ऐ जिन्न व इन्स के गिरोह, अगर तुम से हो सके कि आसमानों और ज़मीन के किनारों से निकल जाओ तो निकल जाओ, जहाँ निकल कर जाओगे उसी की सल्तनत है(6){33}
(6) तुम उससे कहीं भाग नहीं सकते.

तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे {34} तुम पर(7)
(7) क़यामत के दिन जब तुम क़ब्रों से निकलोगे.

छोड़ी जाएगी बेधुंए की आग की लपट और बेलपट का काला धुंआं(8)
(8) इमाम अहमद रज़ा ने फ़रमाया लपट में धुवाँ हो तो उसके सब हिस्से जलाने वाले न होंगे कि ज़मीन के हिस्से शामिल हैं जिनसे धुंआँ बनता है और धुंऐं में लपट हो तो वह पूरा सियाह और अंधेरा न होगा कि लपट की रंगत शामिल है उनपर बेधुंवे की लपट भेजी जाएगी जिसके सब हिस्से जलाने वाले होंगे और बेलपट का धुवाँ जो सख़्त काला अंधेरा और उसी के करम की पनाह……

तो फिर बदला न ले सकोगे(9){35}
(9) उस अज़ाब से न बच सकोगे और आपस में एक दूसरे की मदद न कर सकोगे बल्कि यह लपट और धुवाँ तुम्हें मेहशर की तरफ़ ले जाएंगे. पहले से इसकी ख़बर दे देना यह भी अल्लाह तआला का करम है ताकि उसकी नाफ़रमानी से बाज़ रह कर अपने आपको उस बला से बचा सको.

तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे {36} फिर जब आसमान फट जाएगा तो ग़ुलाब के फूल सा हो जाएगा (10)
(10) कि जगह जगह से शक़ और रंगत का सुर्ख़.

जैसे सुर्ख़ नरी (बकरे की रंगी हुई खाल) {37} तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे{38}
तो उस दिन(11)
(11) यानी जबकि मुर्दे क़ब्रों से उठाए जाएंगे और आसमान फटेगा.

गुनाहगार के गुनाह की पूछ न होगी किसी आदमी और जिन्न से(12){39}
(12) उस रोज़ फ़रिश्ते मुजरिमों से पूछेंगे नहीं, उनकी सूरतें ही देखकर पहचान लेंगे. और सवाल दूसरे वक़्त होगा जब मैदाने मेहशर में जमा होंगे.

तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे {40} मुजरिम अपने चेहरे से पहचाने जाएंगे(13)
(13) कि उनके मुंह काले और आँखें नीली होंगी.

तो माथा और पाँव पकड कर जहन्नम में डाले जाएंगे(14){41}
(14) पाँव पीठे के पीछे से लाकर पेशानियों से मिला दिये जाएंगे और घसीट कर जहन्नम में डाले जाएंगे और यह भी कहा गया है कि कुछ लोग पेशानियों से घसीटे जाएंगे. कुछ पाँव से.

तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे (15) {42}
(15) और उनसे कहा जाएगा.

यह है वह जहन्नम जिसे मुजरिम झुटलाते हैं {43} फेरे करेंगे इसमें और इन्तिहा के जलते खौलते पानी में(16){44} तो अपने रब की कौन सी नेअमत झुटलाओगे{45}
(16) कि जब जहन्नम की आग से जल भुनकर फ़रियाद करेंगे तो उन्हें जलता खौलता पानी पिलाया जाएगा और उसके अज़ाब में मुब्तिला किये जाएंगे. ख़ुदा की नाफ़रमानी के इस परिणाम से आगाह करना अल्लाह की नेअमत है.

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