50 Surah Al-Qaaf

50 सूरए क़ाफ़ -तीसरा रूकू

50|30|يَوْمَ نَقُولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ امْتَلَأْتِ وَتَقُولُ هَلْ مِن مَّزِيدٍ
50|31|وَأُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ غَيْرَ بَعِيدٍ
50|32|هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظٍ
50|33|مَّنْ خَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ وَجَاءَ بِقَلْبٍ مُّنِيبٍ
50|34|ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُلُودِ
50|35|لَهُم مَّا يَشَاءُونَ فِيهَا وَلَدَيْنَا مَزِيدٌ
50|36|وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَشَدُّ مِنْهُم بَطْشًا فَنَقَّبُوا فِي الْبِلَادِ هَلْ مِن مَّحِيصٍ
50|37|إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِمَن كَانَ لَهُ قَلْبٌ أَوْ أَلْقَى السَّمْعَ وَهُوَ شَهِيدٌ
50|38|وَلَقَدْ خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبٍ
50|39|فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ الْغُرُوبِ
50|40|وَمِنَ اللَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَارَ السُّجُودِ
50|41|وَاسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ الْمُنَادِ مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
50|42|يَوْمَ يَسْمَعُونَ الصَّيْحَةَ بِالْحَقِّ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُرُوجِ
50|43|إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي وَنُمِيتُ وَإِلَيْنَا الْمَصِيرُ
50|44|يَوْمَ تَشَقَّقُ الْأَرْضُ عَنْهُمْ سِرَاعًا ۚ ذَٰلِكَ حَشْرٌ عَلَيْنَا يَسِيرٌ
50|45|نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِجَبَّارٍ ۖ فَذَكِّرْ بِالْقُرْآنِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ

जिस दिन हम जहन्नम से फ़रमाएंगे क्या तू भर गई(1)
(1) अल्लाह तआला ने जहन्नम से वादा फ़रमाया है कि उसे जिन्नों और इन्सानों से भरेगा. इस वादे की तहक़ीक़ के लिये जहन्नम से यह सवाल किया जाएगा.

वह अर्ज़ करेगी कुछ और ज़्यादा है(2){30}
(2) इसके मानी ये भी हो सकते हैं कि अब मुझ में गुन्जाइश बाक़ी नहीं, मैं भरचुकी. और ये भी हो सकते हैं कि अभी और गुन्जाइश है.

और पास लाई जाएगी जन्नत परहेज़गारों के कि उनसे दूर न होगी(3){31}
(3) अर्श के दाईं तरफ़, जहाँ से मेहशर वाले उसे देखेंगे और उनसे कहा जाएगा.

यह है वह जिस का तुम वादा दिये जाते हो(4)
(4) रसूलों के माध्यम से दुनिया में.

हर रूजू लाने वाले निगहदाश्त वाले के लिये (5){32}
(5) रूजू लाने वाले से वह मुराद है जो गुनाहों को छोड़कर फ़रमाँबरदारी इख़्तियार करे. सईद बिन मुसैयब ने फ़रमाया अव्वाब यानी रूजू लाने वाला वह है जो गुनाह करे फिर तौबह करे, फिर गुनाह करे फिर तौबह करे. और निगहदाश्त करने वाला है जो अल्लाह के हुक्म का लिहाज़ रखे. हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया जो अपने आपको गुनाहों से मेहफ़ूज़ रखे और उनसे इस्तिग़फार करे और यह भी कहा गया है कि जो अल्लाह तआला की अमानतों और उसके हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त करे और यह भी बयान किया गया है कि जो ताअतों का पाबन्द हो, ख़ुदा और रसूल के हुक्म बजा लाए और अपने नफ़्स की निगहबानी करे यानी एक दम भी यादे-इलाही से ग़ाफ़िल न हो. पासे-अन्फ़ास करे यानी अपनी एक एक सांस का हिसाब रखे.

जो रहमान से बेदेखे डरता है और जो रूजू करता हुआ दिल लाया(6){33}
(6) यानी इख़लास वाला, फ़रमाँबरदार और अक़ीदे का सच्चा दिल.

उनसे फ़रमाया जाएगा जन्नत में जाओ सलामती के साथ (7)
(7) बेख़ौफ़ों ख़तर, अम्न व इत्मीनान के साथ, न तुम्हें अज़ाब हो न तुम्हारी नेअमतें ख़त्म या कम हों.

यह हमेशगी का दिन है(8){34}
(8) अब न फ़ना है न मौत.

उनके लिये है इसमें जो चाहें और हमारे पास इससे भी ज़्यादा है(9){35}
(9) जो वो तलब करें और वह अल्लाह का दीदार और उसकी तजल्ली है जिससे हर शुक्र वार को बुज़ुर्गी के साथ नवाज़े जाएंगे.

और उनसे पहले (10)
(10) यानी आपके ज़माने के काफ़िरों से पहले.

हमने कितनी संगतें हलाक़ फ़रमा दीं कि गिरफ़्त में उनसे सख़्त थीं (11)
(11) यानी वो उम्मतें उनसे ताक़तवर और मज़बूत थीं.

तो शहरों में काविशें कीं(12)
(12) और जुस्तजू में जगह जगह फिरा किये.

है कहीं भागने की जगह(13){36}
(13) मौत और अल्लाह के हुक्म से मगर कोई ऐसी जगह न पाई.

बेशक इसमें नसीहत है उसके लिये जो दिल रखता हो(14)
(14) जानने वाला दिल. शिबली रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया कि क़ुरआनी नसीहतों से फ़ैज़े हासिल करने के लिये हाज़िर दिल चाहिये जिसमें पलक झपकने तक की गफ़लत न आए.

या कान लगाए (15)
(15) क़ुरआन और नसीहत पर.

और मुतवज्जह हो {37} और बेशक हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उनके बीच है छ: दिन में बनाया, और तकान हमारे पास न आई(16){38}
(16) मुफ़स्सिरों ने कहा कि यह आयत यहूदियों के रद में नाज़िल हुई जो यह कहते थे कि अल्लाह तआला ने आसमान और ज़मीन और उनके दर्मियान की कायानात को छ रोज़ में बनाया जिनमें से पहला यकशम्बा है और पिछला शुक्रवार, फिर वह (मआज़ल्लाह) थक गया और सनीचर को उसने अर्श पर लेट कर आराम किया. इस आयत में इसका रद है कि अल्लाह तआला इससे पाक है कि वह थके. वह क़ादिर है कि एक आन में सारी सृष्टि बना दे. हर चीज़ का अपनी हिकमत के हिसाब से हस्ती अता फ़रमाता है. शाने इलाही में यहूदियों का यह कलिमा सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को बहुत बुरा लगा और ग़ुस्से से आपके चेहरे पर लाली छा गई तो अल्लाह तआला ने आपकी तस्कीन फ़रमाई और ख़िताब फ़रमाया.

तो उनकी बातों पर सब्र करो और अपने रब की तारीफ़ करते हुए उसकी पाकी बोलो सूरज चमकने से पहले और डूबने से पहले(17){39}
(17) यानी फ़ज्र व ज़ोहर व अस्र के वक़्त.

और कुछ रात गए उसकी तस्बीह करो(18)
(18) यानी मग़रिब व इशा व तहज्जुद के वक़्त.

और नमाज़ों के बाद (19){40}
(19) हदीस में हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा से रिवायत है कि सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने तमाम नमाज़ों के बाद तस्बीह करने का हुक्म फ़रमाया. (बुख़ारी) हदीस में है सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया जो व्यक्ति हर नमाज़ के बाद 33 बार सुब्हानल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह और तैंतीस बार अल्लाह अकबर और एक बार ला इलाहा इल्लल्लाहो वहदू ला शरीका लहू लहुल मुल्को व लहुल हम्दो व हुवा अला कुल्ले शैइन क़दीर पढ़े उसके गुनाह बख़्शे जाएं चाहे समन्दर के झागों के बराबर हों यानी बहुत ही ज़्यादा हों. (मुस्लिम शरीफ़)

और कान लगाकर सुनो जिस दिन पुकारने वाला पुकारेगा(20)
(20) यानी हज़रत इस्राफ़ील अलैहिस्सलाम.

एक पास जगह से(21){41}
(21) यानी बैतुल मक़दिस के गुम्बद से जो आस्मान की तरफ़ ज़मीन का सबसे क़रीब मक़ाम है. हज़रत इस्राफ़ील की निदा यह होगी ऐ गली हुई हड्डियों, बिखरे हुए जोड़ो, कण कण हुए गोश्तो, बिखरे हुए बालो ! अल्लाह तआला तुम्हें फ़ैसले के लिये जमा होने का हुक्म देता है.

जिस दिन चिंघाड़ सुनेंगे(22)
(22) सब लोग, मुराद इससे सूर का दूसरी बार फूंका जाना है.

हक़ के साथ, यह दिन है, क़ब्रों से बाहर आने का {42} बेशक हम जिलाएं और हम मारें और हमारी तरफ़ फिरना है(23){43}
(23) आख़िरत में.

जिस दिन ज़मीन उन से फटेगी तो जल्दी करते हुए निकलेंगे (24)
(24) मुर्दे मेहशर की तरफ़.

यह हश्र है हम को आसान{44}हम ख़ूब जान रहे हैं जो वो कह रहे हैं(25)
(25) यानी क़ुरैश के काफ़िर.

और कुछ तुम उनपर जब्र करने वाले नहीं(26) तो क़ुरआन से नसीहत करो उसे जो मेरी धमकी से डरे{45}
(26) कि उन्हें ज़बरदस्ती इस्लाम में दाख़िल करो, आपका काम दावत देना और समझा देना है.

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