48-Surah-Fatah

48 सूरए फ़त्ह -चौथा रूकू

لَّقَدْ صَدَقَ اللَّهُ رَسُولَهُ الرُّؤْيَا بِالْحَقِّ ۖ لَتَدْخُلُنَّ الْمَسْجِدَ الْحَرَامَ إِن شَاءَ اللَّهُ آمِنِينَ مُحَلِّقِينَ رُءُوسَكُمْ وَمُقَصِّرِينَ لَا تَخَافُونَ ۖ فَعَلِمَ مَا لَمْ تَعْلَمُوا فَجَعَلَ مِن دُونِ ذَٰلِكَ فَتْحًا قَرِيبًا
هُوَ الَّذِي أَرْسَلَ رَسُولَهُ بِالْهُدَىٰ وَدِينِ الْحَقِّ لِيُظْهِرَهُ عَلَى الدِّينِ كُلِّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا
مُّحَمَّدٌ رَّسُولُ اللَّهِ ۚ وَالَّذِينَ مَعَهُ أَشِدَّاءُ عَلَى الْكُفَّارِ رُحَمَاءُ بَيْنَهُمْ ۖ تَرَاهُمْ رُكَّعًا سُجَّدًا يَبْتَغُونَ فَضْلًا مِّنَ اللَّهِ وَرِضْوَانًا ۖ سِيمَاهُمْ فِي وُجُوهِهِم مِّنْ أَثَرِ السُّجُودِ ۚ ذَٰلِكَ مَثَلُهُمْ فِي التَّوْرَاةِ ۚ وَمَثَلُهُمْ فِي الْإِنجِيلِ كَزَرْعٍ أَخْرَجَ شَطْأَهُ فَآزَرَهُ فَاسْتَغْلَظَ فَاسْتَوَىٰ عَلَىٰ سُوقِهِ يُعْجِبُ الزُّرَّاعَ لِيَغِيظَ بِهِمُ الْكُفَّارَ ۗ وَعَدَ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِنْهُم مَّغْفِرَةً وَأَجْرًا عَظِيمًا

बेशक अल्लाह ने सच कर दिया अपने रसूल का सच्चा ख़्वाब (1)
(1) रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने हुदैबिय्यह का इरादा फ़रमाने से पहले मदीनए तैय्यिबह में ख़्वाब देखा था कि आप सहाबा के साथ मक्कए मुअज़्ज़मा में दाख़िल हुए और सहाबा ने सर के बाल मुंडाए, कुछ ने छोटे करवाए. यह ख़्वाब आपने अपने सहाबा से बयान किया तो उन्हें ख़ुशी हुई और उन्होंने ख़याल किया कि इसी साल वो मक्कए मुकर्रमा में दाख़िल होंगे. जब मुसलमान हुदैबिय्यह से सुलह के बाद वापस हुए और उस साल मक्कए मुकर्रमा में दाख़िला न हुआ तो मुनाफ़िक़ों ने मज़ाक़ किया, तअने दिये और कहा कि वह ख़्वाब क्या हुआ. इस पर अल्लाह तआला ने यह आयत उतारी और उस ख़्वाब के मज़मून की तस्दीक़ फ़रमाई कि ज़रूर ऐसा होगा. चुनांन्चे अगले साल ऐसा ही हुआ और मुसलमान अगले साल बड़ी शान व शौकत के साथ मक्कए मुकर्रमा में विजेता के रूप में दाख़िल हुए.

बेशक तुम ज़रूर मस्जिदे हराम में दाख़िल होंगे अगर अल्लाह चाहे अम्नो अमान से अपने सरों के(2)
(2) सारे.

बाल मुंडाते या(3)
(3) थोड़े से.

तरशवाते बेख़ौफ़, तो उसने जाना जो तुम्हे मालूम नहीं(4)
(4) यानी यह कि तुम्हारा दाख़िल होना अगले साल है और तुम इसी साल समझे थे और तुम्हारे लिये यह देरी बेहतर थी कि इसके कारण वहाँ के कमज़ोर मुसलमान पामाल होने से बच गए.

तो उससे पहले (5)
(5) यानी हरम में दाख़िले से पहले.

एक नज़्दीक़ आने वाली फ़त्ह रखी(6) {27}
(6) ख़ैबर की विजय, कि वादा की गई विजय के हासिल होने तक मुसलमानों के दिल इस से राहत पाएं. उसके बाद जब अगला साल आया तो अल्लाह तआला ने हुज़ूर के ख़्वाब का जलवा दिखाया और घटनाएं उसी के अनुसार घटीं. चुनांन्वे इरशाद फ़रमाता है.
वही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा कि उसे सब दीनों पर ग़ालिब करे(7)
(7) चाहे वो मुश्रिकों के दीन हों या एहले किताब के. चुनांन्चे अल्लाह तआला ने यह नेअमत अता फ़रमाई और इस्लाम को तमाम दीनों पर ग़ालिब फ़रमा दिया.

और अल्लाह काफ़ी है गवाह (8){28}
(8) अपने हबीब मुहम्मदे मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की.

मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं और उनके साथ वाले (9)
(9) यानी उसके साथी.

काफ़िरों पर सख़्त हैं(10)
(10) जैसा कि शेर शिकार पर, और सहाबा की सख़्ती काफ़िरों के साथ इस क़द्र थीं कि वो लिहाज़ रखते थे कि उनका बदन किसी काफ़िर के बदन से न छू जाए और उनके कपड़े पर किसी काफ़िर का कपड़ा न लगने पाए. (मदारिक)

और आपस में नर्म दिल (11)
(11) एक दूसरे पर मेहरबानी करने वाले कि जैसे बाप बेटे में हो और यह महब्बत इस हद तक पहुंच गई कि जब एक मूमिन दूसरे को देखे तो महब्बत के जोश से हाथ मिलाए और गले से लगाए.

उन्हें देखेगा रूकू करते सज्दे में गिरते(12)
(12) बहुतान से नमाज़े पढ़ते, नमाज़ों पर हमेशगी करते.

अल्लाह का फ़ज़्ल और रज़ा चाहते, उनकी निशानी उनके चेहरों में है सज्दों के निशान से(13)
(13) और यह अलामत वह नूर है जो क़यामत के दिन उनके चेहरों पर चमकता होगा उससे पहचाने जाएंगे कि उन्होंने दुनिया में अल्लाह तआला के लिये बहुत सज्दे किये हैं और यह भी कहा गया है कि उनके चेहरों में सज्दे की जगह चौदहवीं के चाँद की तरह चमकती होगी. अता का क़ौल है कि रात की लम्बी नमाज़ों से उनके चेहरों पर नूर नुमायाँ होता है जैसा कि हदीस शरीफ़ में है कि जो रात को नमाज़ की बहुतात रखता है सुब्ह को उसका चेहरा ख़ूबसूरत हो जाता है यह भी कहा गया है कि मिट्टी का निशान भी सज्दे की अलामत है.

यह उनकी सिफ़त (विशेषता) तौरात में है और उनकी सिफ़त इंजील में हैं(14)
(14) यह बयान किया गया है कि.

जैसे एक खेती उसने अपना पट्ठा निकाला फिर उसे ताक़त दी फिर दबीज़ (मोटी) हुई फिर अपनी पिंडली पर सीधी खड़ी हुई किसानों को भली लगती है (15)
(15) यह उदाहरण इस्लाम की शुरूआत और उसकी तरक़्की की बयान की गई कि नबीये करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम अकेले उठे फिर अल्लाह तआला ने आप को आपके सच्चे महब्बत रखने वाले साथियों से क़ुव्वत अता फ़रमाई. क़तादह ने कहा कि सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के सहाबा की मिसाल इन्जील में यह लिखी है कि एक क़ौम खेती की तरह पैदा होगी और वो नेकियों का हुक्म करेंगे, बुराईयों से रोकेंगे, कहा गया है कि खेती हुज़ूर है और उसकी शाख़े सहाबा और ईमान वाले.

ताकि उनसे काफ़िरों के दिल जलें, अल्लाह ने वादा किया उनसे जो उनमें ईमान और अच्छे कामों वाले हैं (16)
(16) सहाबा सबके सब ईमान वाले और नेक कर्मों वाले हैं इसलिये यह वादा सभी से है.
बख़्शिश और बड़े सवाब का{29}

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