43 सूरए ज़ुख़रूफ़ -पांचवाँ रूकू

43 सूरए ज़ुख़रूफ़ -पांचवाँ रूकू

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَقَالَ إِنِّي رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
فَلَمَّا جَاءَهُم بِآيَاتِنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ
وَمَا نُرِيهِم مِّنْ آيَةٍ إِلَّا هِيَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
وَقَالُوا يَا أَيُّهَ السَّاحِرُ ادْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنَا لَمُهْتَدُونَ
فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ إِذَا هُمْ يَنكُثُونَ
وَنَادَىٰ فِرْعَوْنُ فِي قَوْمِهِ قَالَ يَا قَوْمِ أَلَيْسَ لِي مُلْكُ مِصْرَ وَهَٰذِهِ الْأَنْهَارُ تَجْرِي مِن تَحْتِي ۖ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
أَمْ أَنَا خَيْرٌ مِّنْ هَٰذَا الَّذِي هُوَ مَهِينٌ وَلَا يَكَادُ يُبِينُ
فَلَوْلَا أُلْقِيَ عَلَيْهِ أَسْوِرَةٌ مِّن ذَهَبٍ أَوْ جَاءَ مَعَهُ الْمَلَائِكَةُ مُقْتَرِنِينَ
فَاسْتَخَفَّ قَوْمَهُ فَأَطَاعُوهُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
فَلَمَّا آسَفُونَا انتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
فَجَعَلْنَاهُمْ سَلَفًا وَمَثَلًا لِّلْآخِرِينَ

और बेशक हमने मूसा को अपनी निशानयों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों की तरफ़ भेजा तो उसने फ़रमाया बेशक मैं उसका रसूल हूँ जो सारे जगत का मालिक है {46} फिर जब वह उनके पास हमारी निशानियाँ लाया(1)
(1) जो मूसा अलैहिस्सलाम की रिसालत को प्रमाणित करती थीं.

जभी वो उनपर हंसने लगे(2){47}
(2) और उनको जादू बताने लगे.

और हम उन्हें जो निशानी दिखाते वह पहले से बड़ी होती(3)
(3) यानी हर एक निशानी अपनी विशेषता में दूसरी से बढ़ी चढ़ी थी. मुराद यह है कि एक से एक उत्तम थी.

और हमने उन्हें मुसीबत में गिरफ़्तार किया कि वो बाज़ आएं (4){48}
(4) कुफ़्र से ईमान की तरफ़ और यह अज़ाब दुष्काल और तुफ़ान और टिड्डी वग़ैरह से किये गए. ये सब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की निशानियाँ थीं जो उनके नबी होने की दलील थीं और उनमें एक से एक उत्तम थी.

और बोले (5)
(5) अज़ाब देखकर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से.

कि ऐ जादूगर (6)
(6) ये कलिमा उनकी बोली और मुहावरे से बहुत आदर और सम्मान का था. वो आलिम व माहिर और हाज़िक़े कामिल को जादूगर कहा करते थे और इसका कारण यह था कि उनकी नज़र में जादू की बहुत अज़मत थी और वो इसको प्रशंसा की बात समझते थे. इसलिये उन्होंने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को इल्तिजा के समय इस कलिमे से पुकारा, कहा.

हमारे लिये अपने रब से दुआ कर उस एहद के कारण जो उसका तेरे पास है(7)
(7) वह एहद या तो यह है कि आपकी दुआ क़ुबूल है या नबुव्वत या ईमान लाने वालों और हिदायत क़ुबूल करने वालों पर से अज़ाब उठा लेना.

बेशक हम हिदायत पर आएंगे(8){49}
(8) ईमान लाएंगे, चुनांन्वे हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने दुआ की और उनपर से अज़ाब उठा लिया गया.

फिर जब हमने उनसे वह मुसीबत टाल दी जभी वो एहद तोड़ गए(9){50}
(9) ईमान न लाए, कुफ़्र पर अड़े रहे.

और फ़िरऔन अपनी क़ौम में(10)
(10) बहुत गर्व से.

पुकारा कि ऐ मेरी क़ौम क्या मेरे लिये मिस्र की सल्तनत नहीं और ये नहरें कि मेरे नीचे बहती हैं (11)
(11) ये नील नदी से निकली हुई बड़ी बड़ी नेहरें थी जो फ़िरऔन के महल के नीचे जारी थीं.

तो क्या तुम देखते नहीं(12) {51}
(12) मेरी महानता और क़ुव्वत और शानों शौकत. अल्लाह तआला की अजीब शान है. ख़लीफ़ा रशीद ने जब यह आयत पढ़ी और मिस्त्र की हुकूमत पर फ़िरऔन का घमण्ड देखा तो कहा कि मैं वह  मिस्त्र अपने मामूली ग़ुलाम को दे दूंगा. चुनांन्वे उन्होंने मिस्त्र ख़सीब को दे दिया जो उनका ग़ुलाम था और वुज़ू कराने की ख़िदमत पर था.

या मैं बेहतर हूँ (13)
(13) यानी क्या तुम्हारे नज़्दीक साबित हो गया और तुमने समझ लिया कि मै बेहतर हूँ.

उससे कि ज़लील है(14)
(14) यह उस बेईमान घमण्डी ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की शान में कहा.

और बात साफ़ करता मालूम नहीं होता(15) {52}
(15) ज़बान में गिरह होने की वजह से जो बचपन में आग मुंह मे रखने के कारण पड़ गई थी और यह उस मलऊन ने झूठ कहा क्योंकि आपकी दुआ से अल्लाह तआला ने ज़बान की वह गिरह ज़ायल कर दी थी लेकिन फ़िरऔनी पहले ही ख़याल में थे. आगे फिर उसी फ़िरऔन का कलाम ज़िक्र फ़रमाया जाता है.

तो उस पर क्यों न डाले गए सोने के कंगन(16)
(16) यानी अगर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम सच्चे है और अल्लाह तआला ने उनको सरदार बनाया है तो उन्हें सोने का कंगन क्यों नहीं पहनाया. यह बात उसने अपने ज़माने के दस्तूर के अनुसार कही कि उस ज़माने में जिस किसी को सरदार बनाया जाता था उसे सोने के कंगन और सोने का तौक़ पहनाया जाता था.

या उसके साथ फ़रिश्ते आते कि उसके पास रहते (17){53}
(17) और उसकी सच्चाई की गवाही देते.

फिर उसने अपनी क़ौम को कम अक़्ल कर लिया (18)
(18) उन जाहिली की अक़्ल भ्रष्ट कर दी और उन्हें बहला फुसला लिया.

तो वो उसके कहने पर चले (19)
(19) और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को झुटलाने लगे.

बेशक वो बेहुक्म लोग थे {54} फिर जब उन्होंने वह किया जिसपर हमारा ग़ज़ब (प्रकोप) उनपर आया हमने उनसे बदला लिया तो हमने उन सबको डुबो दिया {55} उन्हें हमने कर दिया अगली दास्तान और कहावत पिछलों के लिये(20) {56}
(20) कि बाद वाले उनके हाल से नसीहत और इब्रत हासिल करें.

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