41 सूरए हामीम सज्दा-तीसरा रूकू

41 सूरए हामीम सज्दा-तीसरा रूकू

وَيَوْمَ يُحْشَرُ أَعْدَاءُ اللَّهِ إِلَى النَّارِ فَهُمْ يُوزَعُونَ
حَتَّىٰ إِذَا مَا جَاءُوهَا شَهِدَ عَلَيْهِمْ سَمْعُهُمْ وَأَبْصَارُهُمْ وَجُلُودُهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
وَقَالُوا لِجُلُودِهِمْ لِمَ شَهِدتُّمْ عَلَيْنَا ۖ قَالُوا أَنطَقَنَا اللَّهُ الَّذِي أَنطَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَهُوَ خَلَقَكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَا أَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلَٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ اللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًا مِّمَّا تَعْمَلُونَ
وَذَٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذِي ظَنَنتُم بِرَبِّكُمْ أَرْدَاكُمْ فَأَصْبَحْتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ
فَإِن يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ ۖ وَإِن يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُم مِّنَ الْمُعْتَبِينَ
۞ وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَاءَ فَزَيَّنُوا لَهُم مَّا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِرِينَ

और जिस दिन अल्लाह के दुश्मन  (1)
(1) यानी काफ़िर अगले और पिछले.

आग की तरफ़ हांके जाएंगे तो उनके अगलों को रोकेंगे {19} यहाँ तक कि पिछले आ मिलें(2)
(2) फिर सबको दोज़ख़ में हाँक दिया जाएगा.

यहां तक कि जब वहाँ पहुंचेंगे उनके कान और उनकी आँखे  और उनके चमड़े सब उनपर उनके किये की गवाही देंगे(3) {20}
(3) शरीर के अंग अल्लाह के हुक्म से बोल उठेंगे और जो जो कर्म किये थे बता देंगे.

और वो अपनी खालों से कहेंगे तुमने हम पर क्यों गवाही दी, वो कहेंगी हमें अल्लाह ने बुलवाया जिसने हर चीज़ को गोयाई (बोलने की ताक़त) बख़्शी और उसने तुम्हें पहली बार बनाया और उसी की तरफ़ तुम्हें फिरना है{21} और तुम (4)
(4) गुनाह करते वक़्त.

उससे कहाँ छुप कर जाते कि तुम पर गवाही दें तुम्हारे कान और तुम्हारी आँखें और तुम्हारी खालें(5)
(5) तुम्हें तो इसका गुमान भी न था बल्कि तुम तो मरने के बाद उठाए जाने और जज़ा के सिरे से ही क़ायल न थे.

लेकिन तुम तो यह समझे बैठे थे कि अल्लाह तुम्हारे बहुत से काम नहीं जानता (6) {22}
(6) जो तुम छुपा कर करते हो. हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया कि काफ़िर यह कहते थे कि अल्लाह तआला ज़ाहिर की बातें जानता है और जो हमारे दिलों में है उसको नहीं जानता.

और यह है तुम्हारा वह गुमान जो तुमने अपने रब के साथ किया और उसने तुम्हें हलाक कर दिया(7)
(7) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अनहुमा ने फ़रमाया मानी ये हैं कि तुम्हें जहन्नम में डाल दिया.

तो अब रह गए हारे हुओं में{23} फिर अगर वो सब्र करें (8)
(8) अज़ाब पर.

तो आग उनका ठिकाना है(9)
(9) यह सब्र भी कारआमद नहीं.

और अगर वो मनाना चाहें तो कोई उनका मनाना न माने (10){24}
(10) यानी हक़ तआला उनसे राज़ी न हो चाहे कितनी ही मिन्नत करें किसी तरह अज़ाब से रिहाई नहीं.

और हमने उनपर कुछ साथी तैनात किये(11)
(11)  शैतानों में से.

उन्होंने उन्हें भला कर दिखाया जो उनके आगे है(12)
(12) यानी दुनिया की ज़ेबो ज़ीनत और नफ़्स की ख़्वाहिशों का अनुकरण.

और जो उनके पीछे (13)
(13) यानी आख़िरत की बात यह वसवसा डालकर कि न मरने के बाद उठना है न हिसाब न अज़ाब, चैन ही चैन है.

और उनपर बात पूरी हुई(14)उन गिरोहों के साथ जो उनसे पहले गुज़र चुके जिन्न और आदमियों के, बेशक वो ज़ियांकार(पापी) थे {25}
(14) अज़ाब की.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: