38 सूरए सॉद -पाँचवां रूकू

38 सूरए सॉद -पाँचवां रूकू

قُلْ إِنَّمَا أَنَا مُنذِرٌ ۖ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ
رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الْعَزِيزُ الْغَفَّارُ
قُلْ هُوَ نَبَأٌ عَظِيمٌ
أَنتُمْ عَنْهُ مُعْرِضُونَ
مَا كَانَ لِيَ مِنْ عِلْمٍ بِالْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ إِذْ يَخْتَصِمُونَ
إِن يُوحَىٰ إِلَيَّ إِلَّا أَنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
إِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِّن طِينٍ
فَإِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي فَقَعُوا لَهُ سَاجِدِينَ
فَسَجَدَ الْمَلَائِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ
إِلَّا إِبْلِيسَ اسْتَكْبَرَ وَكَانَ مِنَ الْكَافِرِينَ
قَالَ يَا إِبْلِيسُ مَا مَنَعَكَ أَن تَسْجُدَ لِمَا خَلَقْتُ بِيَدَيَّ ۖ أَسْتَكْبَرْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ الْعَالِينَ
قَالَ أَنَا خَيْرٌ مِّنْهُ ۖ خَلَقْتَنِي مِن نَّارٍ وَخَلَقْتَهُ مِن طِينٍ
قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ
وَإِنَّ عَلَيْكَ لَعْنَتِي إِلَىٰ يَوْمِ الدِّينِ
قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِي إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ الْمُنظَرِينَ
إِلَىٰ يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ
قَالَ فَبِعِزَّتِكَ لَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ
قَالَ فَالْحَقُّ وَالْحَقَّ أَقُولُ
لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكَ وَمِمَّن تَبِعَكَ مِنْهُمْ أَجْمَعِينَ
قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُتَكَلِّفِينَ
إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ
وَلَتَعْلَمُنَّ نَبَأَهُ بَعْدَ حِينٍ

तुम फ़रमाओ (1)
(1) ऐ सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैका वसल्लम, मक्के के काफ़िरों से.

मैं डर सुनाने वाला हूँ (2)
(2) तुम्हें अल्लाह के अज़ाब का डर दिलाता हूँ.

और मअबूद कोई नहीं मगर एक अल्लाह सब पर ग़ालिब (सर्वोपरि) {65} मालिक आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके बीच है, इज़्ज़त वाला बड़ा बख़्शने वाला {66} तुम फ़रमाओ वह(3)
(3) यानी क़ुरआन या क़यामत या मेरा डराने वाला रसूल होना या अल्लाह तआला का वहदहू ला शरीक लहू होना.

बड़ी ख़बर है {67} तुम उससे ग़फ़लत में हो (4) {68}
(4) कि मुझ पर ईमान नहीं लाते और क़ुरआन शरीफ़ और मेरे दीन को नहीं मानते.

मुझे आलमे बाला की क्या ख़बर थी जब वो झगड़ते थे (5){69}
(5) यानी फ़रिश्ते हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के बाब में, यह हज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के सच्चे नबी होने की एक दलील है. मुद्दआ यह है कि आलमे बाला में फ़रिश्तों का हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के बाब में सवाल जवाब करना मुझे क्या मालूम होता, अगर में नबी न होता. उसकी ख़बर देना नबुव्वत और मेरे पास वही आने की दलील है.

मुझे तो यही वही होती है कि मैं नहीं मगर रौशन डर सुनाने वाला(6)
(6) दारिमी और तिरमिज़ी की हदीसों में है सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया कि मैं अपने बेहतरीन हालात में अपने इज़्ज़त और जलाल वाले रब के दीदार से मूशर्रफ़ हुआ. (हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा फ़रमाते हैं कि मेरे ख़याल में यह वाक़िआ ख़्वाब का है) हुज़ूर अलैहिस्सलातो वस्सलाम फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने फ़रमाया ऐ मुहम्मद, आलमे बाला के फ़रिश्ते किस बहस में हैं. मैंने अर्ज़ किया यारब तू ही दाना है. हुज़ूर ने फ़रमाया फिर रब्बुल इज़्ज़त ने अपना दस्ते रहमतो करम मेरे दोनों शानों के बीच रखा और मैं ने उसके फ़ैज़ का असर अपने दिल में पाया तो आसमान व ज़मीन की सारी चीज़ें मेरे इल्म में आ गई. फिर अल्लाह तआला ने फ़रमाया या मुहम्मद, क्या तुम जानते कि आलमे बाला के फ़रिश्ते किस चीज़ में बहस कर रहे हैं. मैं ने अर्ज़ किया, हाँ ऐ रब मैं जानता हूँ वह कफ़्फ़ारों में बहस कर रहे हैं और कफ़्फ़ारे ये हैं नमाज़ों के बाद मस्जिद में ठहरना और पैदल जमाअतों के लिये जाना और जिस वक़्त सर्दी वग़ैरह के कारण पानी का इस्तेमाल नागवार हो उस वक़्त अच्छी तरह वुज़ू करना, जिसने यह किया उसकी ज़िन्दगी भी बेहतर, मौत भी बेहतर. और गुनाहों से ऐसा पाक साफ़ निकलेगा जैसा अपनी विलादत के दिन था. और फ़रमाया, ऐ मुहम्मद !  नमाज़ के बाद यह दुआ किया करो “अल्लाहुम्मा इन्नी असअलोका फ़िअलल ख़ैराते व तर्कल मुन्कराते व हुब्बल मसाकीने व इज़ा अरदता बि इबादिका फ़ित-नतन फ़क़बिदनी इलैका ग़ैरा मफ़तूनिन”. कुछ रिवायतों में यह है कि हज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया मुझे हर चीज़ रौशन हो गई और मैंने पहचान ली और एक रिवायत में है कि जो कुछ पूरब और पच्छिम में है सब मैं ने जान लिया. इमाम अल्लामा अलाऊदीन अली बिन मुहम्मद बिन इब्राहीम बग़दादी जो ख़ाज़िन के नाम से जाने जाते हैं, अपनी तफ़सीर में इसके मानी ये बयान फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का सीनए मुबारक खोल दिया और क़ल्बे शरीफ़ मुनव्वर कर दिया और जो कोई न जाने उस सब की पहचान आप को अता कर दी यहाँ तक कि आपने नेअमत और मअरिफ़त की सर्दी अपने क़ल्बे मुबारक में पाई और जब क़ल्बे शरीफ़ मुनव्वर हो गया और सीनए पाक खुल गया तो जो कुछ आसमानों और जो कुछ ज़मीनों में है अल्लाह तआला के दिये से जान लिया.

जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से फ़रमाया कि मैं मिट्टी से इन्सान बनाऊंगा (7){70}
(7) यानी आदम को पैदा करूंगा.

फिर जब मैं उसे ठीक बना लूं(8)
(8) यानी उसकी पैदायश तमाम कर दूँ.

और उसमें अपनी तरफ़ की रूह फूंकूं (9)
(9) और उसको ज़िन्दगी अता कर दूँ.

तो तुम उसके लिये सज्दे में गिरना {71} तो सब फ़रिश्तों ने सज्दा किया एक एक ने कि कोई बाक़ी न रहा {72} मगर इब्लीस ने(10)
(10) सज्दा न किया.

उसने घमण्ड किया और वह था ही काफ़िरों में(11) {73}
(11) यानी अल्लाह के इल्म में.

फ़रमाया ऐ इब्लीस तुझे किस चीज़ ने रोका कि तू उसके लिये सज्दा करे जिसे मैं ने अपने हाथों से बनाया क्या तुझे घमण्ड आ गया या तू था ही घमण्डियों में(12) {74}
(12) यानी उस क़ौम में से जिनका शेवा ही घमण्ड है.

बोला मैं उससे बेहतर हूँ (13)
(13) इससे उसकी मुराद यह थी कि अगर आदम आग से पैदा किये जाते और मेरे बराबर होते जब भी मैं उन्हें सज्दा न करता, तो फिर उनसे बेहतर होकर उन्हें कैसे सिजदा करूं.

तूने मुझे आग से बनाया और उसे मिट्टी से पैदा किया {75} फ़रमाया तो जन्नत से निकल जा कि तू रांदा गया(14) {76}
(14) अपनी सरकशी और नाफ़रमानी और घमण्ड के कारण, फिर अल्लाह तआला ने उसकी सूरत बदल दी. वह पहले हसीन था, बदशकल काला मुंह कर दिया गया और उसकी नूरानियत सल्ब कर ली गई.

और बेशक तुझ पर मेरी लअनत है क़यामत तक(15) {77}
(15) और क़यामत के बाद लानत भी तरह तरह के अज़ाब भी.

बोला ऐ मेरे रब ऐसा है तो मुझे मोहलत दे उस दिन तक कि उठाए जाएं (16) {78}
(16) आदम अलैहिस्सलाम और उनकी सन्तान अपने फ़ना होने के बाद जज़ा के लिये, और इससे उसकी मुराद यह थी कि वह इन्सानों को गुमराह करने के लिये छूट पाए और उनसे अपना बुग्ज़ ख़ूब निकाले और मौत से बिल्कुल बच जाए क्योंकि उठने के बाद फिर मौत नहीं.

फ़रमाया तो तू मोहलत वालों में है {79}  उस जाने हुए वक़्त के दिन तक (17){80}
(17) यानी सूर के पहले फूंके जाने तक जिसको ख़ल्क़ की फ़ना के लिये निर्धारित फ़रमाया गया.

बोला तेरी इज़्ज़त की क़सम ज़रूर मैं उन सब को गुमराह कर दूंगा {81}मगर जो उनमें तेरे चुने  हुए बन्दे हैं {82} फ़रमाया तो सच यह है और मैं सच ही फ़रमाता हूँ {83} बेशक मैं ज़रूर जहन्नम भर दूंगा तुझसे (18)
(18)

और उनमें से (19)
(19) यानी इन्सानों में से.

जितने तेरी पैरवी करेंगे. सब से {84} तुम फ़रमाओ मैं इस क़ुरआन पर तुम से कुछ अज्र नहीं मांगता और मैं बनावट वालों में नहीं {85} वह तो नहीं मगर नसीहत सारे जगत के लिये {86} और ज़रूर एक वक़्त के बाद तुम इसकी ख़बर जानोगे(20){87}
(20) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया कि मौत के बाद, और एक क़ौल यह है कि क़यामत के दिन.

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