सूरए रूम- तीसरा रूकू

30 – सूरए रूम- तीसरा रूकू

وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ إِذَا أَنتُم بَشَرٌ تَنتَشِرُونَ
وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا لِّتَسْكُنُوا إِلَيْهَا وَجَعَلَ بَيْنَكُم مَّوَدَّةً وَرَحْمَةً ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
وَمِنْ آيَاتِهِ خَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافُ أَلْسِنَتِكُمْ وَأَلْوَانِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّلْعَالِمِينَ
وَمِنْ آيَاتِهِ مَنَامُكُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَابْتِغَاؤُكُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ
وَمِنْ آيَاتِهِ يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَيُحْيِي بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
وَمِنْ آيَاتِهِ أَن تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِّنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنتُمْ تَخْرُجُونَ
وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ كُلٌّ لَّهُ قَانِتُونَ
وَهُوَ الَّذِي يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَهُوَ أَهْوَنُ عَلَيْهِ ۚ وَلَهُ الْمَثَلُ الْأَعْلَىٰ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ

और उसकी निशानियों से है यह कि तुम्हें पैदा किया मिट्टी से(1)
(1) तुम्हारे जद्दे आला और तुम्हारी अस्ल हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को उससे पैदा करके.

फिर जभी तुम इन्सान हो दुनिया में फैले हुए {20} और उसकी निशानियों से है कि तुम्हारे लिये तुम्हारी ही जिन्स से जोड़े बनाए कि उनसे आराम पाओ और तुम्हारे आपस में महब्बत और रहमत रखी (2)
(2) कि बग़ैर किसी पहली पहचान और बग़ैर किसी रिश्तेदारी के एक को दूसरे के साथ महब्बत और हमदर्दी है.

बेशक उसमें निशानियाँ हैं ध्यान करने वालों के लिये {21} और उसकी निशानियों से है आसमानों और ज़मीन की पैदायश और तुम्हारी ज़बानों और रंगतों का अन्तर(3)
(3) ज़बानों की भिन्नता तो यह है कि कोई अरबी बोलता है, कोई अजमी, कोई और कुछ. और रंगतों की भिन्नता यह है कि कोई गोरा है कोई काला और कोई गेहूं रंग का. और यह भिन्नता बड़ी अजीब है क्योंकि सब एक अस्ल से हैं और सब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की औलाद हैं.

बेशक इसमें निशानियाँ हैं जानने वालों के लिये {22} और उसकी निशानियों में हैं रात और दिन में तुम्हारा सोना(4)
(4) जिससे थकन दूर होती है और राहत हासिल होती है.

और उसका फ़ज़्ल तलाश करना(5)
(5) फ़ज़्ल तलाश करने से रोज़ी की खोज मुराद है.

बेशक इसमें निशानियाँ है सुनने वालों के लिये(6){23}
(6) जो होश के कानों से सुने.

और उसकी निशानियों से है कि तुम्हें बिजली दिखाता है डराती(7)
(7) गिरने और नुक़सान पहुंचाने से.

और उम्मीद दिलाती(8)
(8) बारिश की.

और आसमान से पानी उतारता है तो उससे ज़मीन को ज़िन्दा करता है उसके मरे पीछे, बेशक इसमें निशानियाँ हैं अक़्ल वालों के लिये(9){24}
(9) जो सोचें और अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करें.

और उसकी निशानियों से है कि उसके हुक्म से आसमान और ज़मीन क़ायम है(10)
(10) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा और हज़रत इब्ने मसऊद रदियल्लाहो अन्हो ने फ़रमाया कि
वो दोनों बिना किसी सहारे के क़ायम हैं.

फिर जब तुम्हे ज़मीन से एक निदा (पुकार) फ़रमाएगा(11)
(11) यानी तुम्हें क़ब्रों से बुलाएगा. इस तरह कि हज़रत इस्राफ़ील अलैहिस्सलाम क़ब्र वालों के उठने के लिये सूर फूंकेंगे तो अगलों और पिछलों में से कोई ऐसा न होगा जो न उठे. चुनान्चे इसके बाद ही इरशाद फ़रमाता है.

जभी तुम निकल पड़ोगे (12){25}
(12) यानी क़ब्रों से ज़िन्दा होकर.

और उसी के हैं जो कोई आसमानों और ज़मीन में हैं, सब उसके हुक्म के नीचे हैं {26} और वही है कि पहले बनाता है फिर उसे दोबारा बनाएगा (13)
(13) हलाक होने के बाद.

और यह तुम्हारी समझ में उसपर ज़्यादा आसान होना चाहिये (14)
(14) क्योंकि इन्सानों का अनुभव और उनकी राय यही बताती है कि किसी चीज़ को दुबारा पैदा करना उसके पहली बार पैदा करने से आसान होता है. और अल्लाह तआला के लिये कुछ भी दुश्वार नहीं है.

और उसी के लिये है सबसे बरतर शान आसमानों और ज़मीन में(15)
(15) कि उस जैसा कोई नहीं. वह सच्चा मअबुद है, उसके सिवा कोई मअबूद नहीं.
और वही इज़्ज़त व हिकमत वाला है{27}

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