22 सूरए हज -दूसरा रूकू

22 सूरए  हज -दूसरा रूकू


और कुछ आदमी अल्लाह की बन्दगी एक किनारे पर करते हैं,(1)
(1) उस में इत्मीनान से दाख़िल नहीं होते  और उन्हें पायदारी हासिल नहीं होती. शक शुब्ह संदेह और आशंका में पड़े रहते हैं जिस तरह पहाड़ के किनारे खड़ा हुआ आदमी डगमगाता रहता है. यह आयत अरब देहातियों की एक जमाअत के बारे में उतरी जो आस पास से आकर मदीने में दाखिल होते और इस्लाम लाते थे. उनकी हालत यह थी कि अगर वो ख़ूब स्वस्थ रहे और उनकी दौलत बढ़ी और उनके बेटा हुआ तब तो कहते थे कि इस्लाम अच्छा दीन है, इसमें आकर हमें फ़ायदा हुआ और अगर कोई बात अपनी उम्मीद के ख़िलाफ़ हुई जैसे कि बीमार पड़ गए या लड़की हो गई या माल की कमी हुई तो कहते थे जबसे हम इस दीन में दाख़िल हुए हैं हमें नुक़सान ही हुआ. और दीन से फिर जाते थे. ये आयत उनके हक में उतरी और बताया गया कि उन्हें अभी दीन में पायदारी ही हासिल नहीं हुई, उनका हाल यह है.

फिर अगर उन्हे कोई भलाई पहुंच गई जब तो चैन से हैं, और जब कोई जांच आकर पड़ी, (2)
(2) किसी क़िस्म की सख़्ती पेश आई.

मुंह के बल पलट गए,(3)
(3) मुर्तद हो गए और कुफ़्र की तरफ़ लौट गए.

दुनिया और आख़िरत दोनों का घाटा,(4)
(4) दुनिया का घाटा तो यह कि जो उनकी उम्मीदें थीं वो पूरी न हुई और दीन से फिरने के कारण उनका क़त्ल जायज़ हुआ और आख़िरत का घाटा हमेशा का अज़ाब.

यही है खुला नुक़सान (5){11}
(5)  वो लोग मुर्तद होने के बाद बुत परस्ती करते हैं और….

अल्लाह के सिवा ऐसे को पूजते हैं जो उनका बुरा भला कुछ न करे,(6)
(6) क्योंकि वह बेजान हैं.

यही है दूर की गुमराही{12} ऐसे को पूजते हैं जिसके नफ़े से(7)
(7) यानी जिसकी पूजा के ख़याली नफ़े से उसके पूजने के…

नुक़सान की तवक़्क़ो(आशा) ज़्यादा है, (8)
(8) यानी दुनिया और आख़िरत के अज़ाब की.

बेशक(9)
(9) वो बुत.

क्या ही बुरा मौला और बेशक क्या ही बुरा साथी{13} बेशक अल्लाह दाख़िल करेगा उन्हें जो ईमान लाए और भले काम किये बाग़ों में जिन के नीचे नहरें बहें, बेशक अल्लाह करता है जो चाहे(10){14}
(10) फ़रमाँबरदारों पर ईनआम और नाफ़रमानों पर अज़ाब.

जो यह ख़याल करता हो कि अल्लाह अपने नबी(11)
(11)  हज़रत मुहम्मदें मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम.

की मदद न फ़रमाएगा दुनिया(12)
(12)  मैं उनके दीन को ग़लबा अता फ़रमा कर.

और आख़िरत में (13)
(13) उनके दर्ज़ें बलन्द करके.

तो उसे चाहिये कि ऊपर को एक रस्सी ताने फिर अपने आपको फांसी देले फिर देखे कि उसका यह दाँव कुछ ले गया उस बात को जिसकी उसे जलन है(14){15}
(14) यानी अल्लाह तआला अपने नबी की मदद ज़रूर फ़रमाएगा. जिसे उससे जलन हो, वह अपनी आख़िरी कोशिश ख़त्म भी कर दे और जलन में मर भी जाए तो भी कुछ नहीं कर सकता.

और बात यही है कि हमने यह क़ुरआन उतारा रौशन आयतें और यह कि अल्लाह राह देता है जिसे चाहे{16} बेशक मुसलमान और यहूदी और सितारा पूजने वाले और ईसाई और आग की पूजा करने वाले और मूर्ति पूजक बेशक अल्लाह उन सब में क़यामत के दिन फैसला कर देगा, (15)
(15) मूमिन को जन्नत अता फ़रमाएगा और काफ़िरों को, किसी क़िस्म के भी हों, जहन्नम में दाख़िल करेगा.

बेशक हर चीज़ अल्लाह के सामने है {17} क्या तुमने न देखा(16)
(16) ऐ हबीबे अकरम सल्लल्लाहो अलैका वसल्लम !

कि अल्लाह के लिये सज्दा करते हैं वो जो आसमानों और ज़मीन में हैं और सूरज और चांद और तारे और पहाड़ और दरख़्त और चौपाए (17)
(17) यकसूई वाला सज्दा, जैसा अल्लाह चाहे.

और बहुत आदमी(18)
(18) यानी मूमिनीन, इसके अलावा सज्दए ताअत और सज्दए इबादत भी.

और बहुत वो हैं जिनपर अज़ाब मुक़र्रर (निश्चित) हो चुका(19)
(19) यानी काफ़िर.{12}

और जिसे चाहे अल्लाह ज़लील करे(20)
(20) उसकी शक़ावत और बुराई के कारण.

उसे कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं बेशक अल्लाह जो चाहे करे{18} ये दो फ़रीक़ (पक्ष) हैं(21)
(21) यानी ईमान वाले और पाँचों क़िस्म के काफ़िर जिनका ज़िक़्र ऊपर किया गया हैं.

कि अपने रब में झगड़े,(22)
(22) यानी इस दीन के बारे में और उसकी सिफ़त में.

तो जो काफ़िर हुए उनके लिये आग के कपड़े ब्यौंते (काटे) गए हैं, (23)
(23) यानी आग उन्हें हर तरफ़ से घेर लेगी.

और उनके सरो पर खोलता पानी डाला जाएगा(24){19}
(24) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया, ऐसा तेज़ गर्म कि अगर उसकी एक बूंद दुनिया के पहाड़ों पर डाल दी जाए तो उनको गला डाले.

जिससे गल जाएगा जो कुछ उनके पेटों में है और उनकी खालें(25){20}
(25) हदीस शरीफ़ में है, फिर उन्हें वैसा ही कर दिया जाएगा. (तिरमिज़ी)

और उनके लिये लोहे के गुर्ज़ (गदा) हैं(26){21}
(26) जिनसे उनको मारा जाएगा.

जब घुटन के कारण उसमें से निकलना चाहेंगे (27)
(27) यानी दोज़ख़ में से, तो गुर्ज़ों से मारकर.
फिर उसी में लौटा दिये जाएंगे, और हुक्म होगा कि चखो आग का अज़ाब{22}

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