22 सूरए हज -चौथा रूकू

22 सूरए   हज -चौथा रूकू


और जबकि हमने इब्राहीम को उस घर का ठिकाना ठीक बता दिया(1)
(1) काबा शरीफ़ की तामीर के वक़्त. पहले यह इमारत हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने बनाई थी, तूफ़ाने नूह के वक़्त वह आसमान पर उठा ली गई. अल्लाह तआला ने एक हवा मुक़र्रर की जिसने उसकी जगह को साफ़ कर दिया और एक क़ौल यह है कि अल्लाह तआला ने एक बादल भेजा जो ख़ास उस स्थान के मुक़ाबिल था जहाँ काबाए मुअज़्ज़मा की इमारत थी. इस तरह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को काबे की जगह बताई गई और आपने उस पुरानी बुनियाद पर काबे की इमारत तामीर की और अल्लाह तआला ने आपको वही फ़रमाई.

और हुक्म दिया कि मेरा कोई शरीक न कर और मेरा घर सुथरा रख(2)
(2) शिर्क से और बुतों से और हर क़िस्म की नापाकियों से.

तवाफ़ (परिक्रमा) वालों और एतिकाफ़ (मस्जिद में बैठना) वालों और रूकू सज्दे वालों के लिये (3)(26)
(3) यानी नमाज़ियों के.

और लोगों में हज की आम निदा (घोषणा) कर दे(4)
(4) चुनांचे हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अबू क़ुबैस पहाड़ पर चढ़कर जगत के लोगों को आवाज़ दी कि बैतुल्लाह का हज करों. जिनकी क़िस्मत में हज है उन्होंने बापों की पीठ और माओं के पेट से जवाब दिया : “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” हम हाज़िर हैं ऐ हमारे रब, हम हाज़िर हैं. हसन रदियल्लाहो अन्हो का क़ौल है कि इस आयत में “अज़्ज़िन” यानी “आम पुकार कर दे” का सम्बोधन सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को है. चुनांचे आख़िरी हज में एलान फ़रमा दिया और इरशाद किया कि ऐ लोगो, अल्लाह ने तुम पर हज फ़र्ज़ किया तो हज करो.

वो तेरे पास हाज़िर होंगे प्यादा और हर दुबली ऊंटनी पर कि हर दूर की राह से आती है(5){27}
(5) और बहुत ज़्यादा सफ़र और घूमने से दुबली हो जाती हैं.

ताकि वो अपना फ़ायदा पाएं(6)
(6) दीनी भी और दुनियावी भी जो इस इबादत के साथ ख़ास हैं, दूसरी इबादत में नहीं पाए जाते.

और अल्लाह का नाम लें(7)
(7) ज़िब्ह के समय.

जाने हुए दिनों में(8)
(8) जाने हुए दिनों से ज़िलहज का अशरा यानी दस दिन मुराद हैं जैसा कि हज़रत अली और इब्ने अब्बास व हसन और क़तादा रदियल्लाहों अन्हुम का क़ौल है और यही मज़हब है हमारे इमामे आज़म हज़रत अबू हनीफ़ा रदियल्लाहो अन्हो का और साहिबैन के नज़्दीक जाने हुए दिनों से क़ुर्बानी के दिन मुराद हैं. यह क़ौल है. हज़रत इब्ने उमर रदियल्लाहो अन्हो का और हर सूरत में यहाँ इन दिनों से ख़ास ईद का दिन मुराद है. (तफ़सीरे अहमदी)

इसपर कि उन्हें रोज़ी दी बेज़बान चौपाए(9)
(9) ऊंट, गाय, बकरी और भेड़.

तो उनमें से ख़ुद खाओ और मुसीबत के मारे मोहताज (दरिद्र) को खिलाओ (10){28}
(10) हर एक क़ुर्बानी से, जिन का इस आयत में बयान है, खाना जायज़ है, बाक़ी क़ुर्बानियों से जायज़ नहीं. (तफ़सीरे अहमदी)

फिर अपना मैल कुचैल उतारें(11)
(11) मूंछ कतरवाएं, नाख़ुन तराशें, बग़लों और पेडू के बाल साफ़ करें.

और अपनी मन्नतें पूरी करें(12)
(12) जो उन्होंने मानी हों.

और उस आज़ाद घर का तवाफ़ (परिक्रमा) करें(13){29}
(13) इससे तवाफ़े ज़ियारत यानी हज़ का फ़र्ज़ तवाफ़ मुराद है. हज के मसाइल तफ़सील से सूरए बक़रा पारा दो में ज़िक्र हो चुके.

बात यह है और जो अल्लाह की हुरमतों (निषेधों) का आदर करें(14)
(14) यानी उसके एहकाम की, चाहे वो हज के संस्कार हों या उनके सिवा और आदेश. कुछ मुफ़स्सिरों ने इस से हज के संस्कार मुराद लिये हैं और कुछ ने बैते हराम, व मशअरे हराम व शहरे हराम व बलदे हराम व मस्जिदे हराम मुराद लिये हैं.

तो वह उसके लिये उसके रब के यहाँ भला है और तुम्हारे लिये हलाल किये गए बेज़बान चौपाए(15)
(15) कि उन्हें ज़िब्ह करके खाओ.

सिवा उनके जिनकी मुमानिअत(मनाही) तुम पर पढ़ी जाती है(16)
(16) क़ुरआन शरीफ़ में, जैसे कि सुरए माइदा की आयत “हुर्रिमत अलैकुम” में बयान फ़रमाई गई.

तो दूर हो बुतों गन्दगी से (17)
(17) जिनकी पूजा करना बदतरीन गन्दगी में लिथड़ना है.

और बचो झुटी बात से {30} एक अल्लाह के होकर कि उसका साझी किसी को न करो और जो अल्लाह का शरीक करे वह मानो गिरा आसमान से कि परिन्दे उसे ले जाते हैं(18)
(18) और बोटी बोटी करके खा जाते हैं.

या हवा उसे किसी दूर जगह फैंकती है(19){31}
(19) मुराद यह है कि शिर्क करने वाला अपनी जान को बहुत बुरी हलाकत में डालता है. ईमान को बलन्दी में आसमान से मिसाल दी गई है और ईमान छोड़ने वाले को आसमान से गिराने वाले के साथ और उसकी नफ़सानी ख़्वाहिशों को जो उसके विचारों को उलट पुलट करती हैं, बोटी बोटी ले जाने वाले पक्षियों के साथ और शैतानों को जो उसको गुमराही की घाटी में फैंकते है, हवा के साथ उपमा दी गई है और इस नफ़ीस मिसाल से शिर्क का बुरा परिणाम समझाया गया.

बात यह है और जो अल्लाह के निशानों का आदर करें तो यह दिलों की परहेज़गारी से है(20){32}
(20) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया कि अल्लाह के निशानों से मुराद क़ुरबानी के जानवर हैं और उनका आदर यह है कि मोटे ताज़े ख़ूबसूरत और क़ीमती लिये जाएं.

तुम्हारे लिये चौपायों में फ़ायदें हैं(21)
(21)  ज़रूरत के वक़्त उन पर सवार होने और उनका दूध पीने के.

एक निश्चित मीआद तक(22)
(22) यानी उनके ज़िब्ह के वक़्त तक.

फिर उनका पहुँचना है उस आज़ाद घर तक(23){33}
(23) यानी हरम शरीफ़ तक जहाँ वो ज़िब्ह किये जाएं.

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