20 सूरए तॉहा -तीसरा रूकू

20 सूरए तॉहा -तीसरा रूकू


हमने ज़मीन ही से तुम्हें बनाया(1)
(1) तुम्हारे बड़े दादा हज़रत आदम को उससे पैदा करके.

और इसी में तुम्हें फिर ले जाएंगे(2)
(2) तुम्हारी मौत और दफ़्न के वक़्त.

और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे (3){55}
(3) क़यामत के दिन.

और बेशक हमने उसे(4)
(4) यानी फ़िरऔन को.

अपनी सब निशानियां(5)
(5) यानी कुल आयतें जो हज़रत मूसा को अता फ़रमाई थीं.

दिखाई तो उसने झुटलाया और न माना(6){56}
(6) और उन आयतों को जादू बताया और सच्चाई क़ुबूल करने से इन्कार किया और—

बोला क्या तुम हमारे पास इसलिये आये हो कि हमें अपने जादू के कारण हमारी ज़मीन से निकाल दो ऐ मूसा(7){57}
(7) यानी हमें मिस्र से निकाल कर ख़ुद उस पर क़ब्ज़ा करो और बादशाह बन जाओ.

तो ज़रूर हम भी तुम्हारे आगे वैसा ही जादू लाएंगे (8)
(8) और जादू में हमारा मुक़ाबला होगा.

तो हम में और अपने में एक वादा ठहरा दो जिससे न हम बदला लें न तुम हमवार जगह हो{58} मूसा ने कहा तुम्हारा वादा मेले का दिन है(9)
(9) इस मेले से फ़िरऔनियों का मेला मुराद है जो उनकी ईद थी और उसमें वो सज धज के जमा होते थे. हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया कि यह दिन आशूरा यानी दसवीं मुहर्रम का था और उस साल ये तारीख़ शनिवार को पड़ी थी. उस दिन को हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने इसलिये निर्धारित किया कि यह दिन उनकी ऊंची शौकत यानी पराकाष्ठा का दिन था उसको मुक़र्रर करना अपनी भरपूर क़ुव्वत का इज़हार है. इसमें यह भी हिकमत थी कि सच्चाई के ज़ुहूर और बातिल की रूस्वाई के लिये ऐसा ही वक़्त मुनासिब है जबकि आस पास के तमाम लोग जमा हों.

और यह लोग कि दिन चढ़े जमा किये जाएं(10){59}
(10) ताकि ख़ूब रौशनी फैल जाय और देखने वाले इत्मीनान से देख सकें और हर चीज़ साफ़ साफ़ नज़र आए.

तो फ़िरऔन फिरा अपने दाँव इकट्ठे किये(11)
(11) बड़ी भारी तादाद में जादूगरों को इकट्ठा किया.

फिर आया(12){60}
(12) वादे के दिन उन सब को लेकर.

उनसे मूसा ने कहा तुम्हें ख़राबी हो अल्लाह पर झूठ न बाँधों(13)
(13) किसी को उसका शरीक करके.

कि वह तुम्हें अज़ाब से हलाक कर दे, और बेशक नामुराद रहा जिसने झूट बांधा(14){61}
(14) अल्लाह तआला पर.

तो अपने मामले में बाहम मुख़्तलिफ़ हो गए(15)
(15) यानी जादूगर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का यह कलाम सुनकर आपस में अलग अलग हो गए. कुछ कहने लगे कि यह भी हमारे जैसे जादूगर हैं, कुछ ने कहा कि ये बातें जादूगरों की नहीं, वो अल्लाह पर झूट बांधने को मना करते हैं.

और छुप कर सलाह की{62}  बोले बेशक ये दोनो (16)
(16) यानी हज़रत मूसा और हज़रत हारून.

ज़रूर जादूगर हैं चाहते हैं कि तुम्हें तुम्हारी ज़मीन से अपने जादू के ज़ोर से निकाल दें और तुम्हारा अच्छा दीन ले जाएं{63} तो अपना दाँव(फरेब) पक्का कर लो फिर परा बांध कर आओ,  और आज मुराद को पहुंचा जो ग़ालिब (विजयी) रहा{64} बोले (17)
(17) जादूगर.

ऐ मूसा या तो तुम डालो(18)
(18) पहले अपनी लाठी.

या हम पहले डालें(19){65}
(19) अपने सामान, शुरूआत करना जादूगरों ने अदब के तौर पर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की मुबारक राय पर छोड़ा और यानी हज़रत मूसा और हज़रत हारून.  उसकी बरकत से आख़िरकार अल्लाह तआला ने उन्हें ईमान की दौलत से नवाज़ा.

मूसा ने कहा बल्कि तुम्हीं डालो,(20)
(20) यह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने इसलिये फ़रमाया कि जो कुछ जादू के धोखे हैं पहले वो सब ज़ाहिर कर चुकें, उसके बाद आप चमत्कार दिखाएं और सत्य झूट को मिटाए और चमत्कार जादू को बातिल कर दे. तो देखने वालों को बसीरत और इब्रत हासिल हो. चुनांचे जादूगरों ने रस्सियाँ लाठियाँ वग़ैरह जो सामान लाए थे सब डाल दिया और लोगों की नज़र बन्दी कर दी.

जभी उनकी रस्सियाँ और लाठियां उनके जादू के ज़ोर से उनके ख़याल में दौड़ती मालूम हुई (21){66}
(21) हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने देखा कि ज़मीन साँपों से भर गई और मीलों मैदान में साँप ही साँप दौड़ रहे हैं और देखने वाले इस झूठी नज़र बन्दी से मसहूर यानी वशीभूत हो गए हैं. कहीं ऐसा न हो कि कुछ चमत्कार देखने से पहले ही इस के असर में आजाएं और चमत्कार न देखें.

तो अपने जी में मूसा ने ख़ौफ़ पाया{67} हमने फ़रमाया डर नहीं बेशक तू ही ग़ालिब है{68} और डाल तो दे जो तेरे दाएं हाथ में है(22)
(22) यानी अपनी लाठी.

और उनकी बनावटों को निगल जाएगा, वो जो बनाकर लाए हैं वह तो जादूगर का धोखा है, और जादूगर का भला नहीं होता कहीं आवे(23){69}
(23) फिर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी लाठी डाली, वह जादूगरों के तमाम अजगरों और साँपों को निगल गई और आदमी उसके डर से घबरा गए. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उसे अपने मुबारक हाथ में लिया तो पहले की तरह लाठी बन गई. यह देखकर जादूगरों को यक़ीन हुआ कि यह चमत्कार है जिससे जादू मुक़ाबला नहीं कर सकता और जादू की नज़रबन्दी इसके सामने नहीं टिक सकती.

तो सब जादूगर सज्दे में गिराए गए बोले हम उसपर ईमान लाए जो हारून और मूसा का रब है(24){70}
(24) सुब्हानल्लाह! क्या अजीब हाल था, जिन लोगों ने अभी कुफ़्र के नशे में रस्सियाँ और लाठियाँ डाली थीं, अभी चमत्कार देख कर उन्होंने शुक्र और सज्दे के लिये सर झुका दिये और गर्दनें डाल दीं. बताया गया है कि इस सज्दे में उन्हें जन्नत और दोज़ख़ दिखाई गई और उन्होंने जन्नत में अपनी मंज़िलें देख लीं.

फ़िरऔन बोला क्या तुम उस पर ईमान लाए इसके पहले कि मैं तुम्हें इजाज़त दूँ, बेशक वह तुम्हारा बड़ा है जिसने तुमको जादू सिखाया(25)
(25) यानी जादू में वह कामिल उस्ताद और तुम सबसे ऊंचा है(मआज़ल्लाह).

तो मुझे क़सम है ज़रूर मैं तुम्हारे एक तरफ़ के हाथ और दूसरी तरफ़ के पांव काटूंगा (26)
(26) यानी दाएं हाथ और बाएं पाँव.

और तुम्हें खजूर के ठुंड पर सूली चढ़ाऊंगा और ज़रूर तुम जान जाओगे कि हम में किस का अज़ाब सख़्त और देरपा है(27){71}
(27) इससे फ़िरऔन मलऊन की मुराद यह थी कि उसका अज़ाब ज़्यादा सख़्त है या सारे जगत के रब का. फ़िरऔन का यह घमण्ड भरा कलिमा सुनकर वो जादूगर—

बोले हम हरगिज़ तुझे तरजीह (प्राथमिकता ) न देंगे उन रौशन दलीलों पर जो हमारे पास आई (28)
(28) चमकती हथैली और हज़रत मूसा की लाठी. कुछ मुफ़स्सिरों ने कहा है कि उनका तर्क यह था कि अगर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के चमत्कार को भी जादू कहता है  तो बता वो रस्से और लाठियाँ  कहाँ गई. कुछ मुफ़स्सिर कहते हैं कि “रोशन दलीलों” से मुराद जन्नत और उसमें अपनी मंज़िलों का देखना है.

हमें अपने पैदा करने वाले की क़सम तो तू कर चूक जो तुझे करना है(29)
(29) हमें उसकी कुछ पर्वाह नहीं.

तू इस दुनिया ही की ज़िन्दगी में तो करेगा(30){72}
(30) आगे तो तेरी कुछ मजाल नहीं और दुनिया नश्वर और यहाँ की हर चीज़ नष्ट होने वाली है. तू मेहरबान भी हो तो हमेशा की ज़िन्दगी नहीं दे सकता फिर दुनिया की ज़िन्दगी और इसकी सारी राहतों के पतन का क्या ग़म. विशेष कर उसको जो जानता है कि आख़िरत में दुनिया के कर्मों का बदला मिलेगा.

बेशक हम अपने रब पर ईमान लाए कि वह हमारी खताएं बख़्श दे और वह जो तूने हमें मजबूर किया जादू पर (31)
(31) हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के मुक़ाबले में, कुछ मुफ़स्सिरों ने फ़रमाया कि फ़िरऔन ने जब जादूगरों को हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के मुक़ाबले के लिये बुलाया था तो जादूगरों ने फ़िरऔन से कहा था कि हम हज़रत मूसा को सोता हुआ देखना चाहते हैं. चुनांचे इसकी कोशिश की गई और उन्हें ऐसा अवसर दिया गया. उन्होंने देखा कि हज़रत सो रहे हैं और लाठी पहरा दे रही है. यह देखकर जादूगरों ने फ़िरऔन से कहा कि मूसा जादूगर नहीं हैं क्योंकि जादूगर जब सोता है तो उस वक़्त उसका जादू काम नहीं करता मगर फ़िरऔन ने उन्हें जादू करने पर मजबूर कर दिया. इसकी माफ़ी के वो अल्लाह तआला से तालिब और उम्मीदवार हैं.

और अल्लाह बेहतर है(32)
(32) फ़रमाँबरदारों को सवाब देने में.

और सब से ज़्यादा बाक़ी रहने वाला (33){73}
(33) नाफ़रमानों पर अज़ाब करने के लिहाज़ से.

बेशक जो अपने रब के हुज़ूर मुजरिम (34)
(34) यानी फ़िरऔन जैसे काफ़िर.

होकर आए तो ज़रूर उसके लिये जहन्नम है जिस में न मरे(35)
(35) कि मरकर ही उससे छूट सके.

न जिये(36){74}
(36) ऐसा जीना जिससे कुछ नुफ़ा उठा सके.

और जो उसके हुज़ूर ईमान के साथ आए कि अच्छे काम किये हों(37)
(37) यानी जिनका ईमान पर खात्मा हुआ हो और उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में नेक कर्म किये हों, फ़र्ज़ और नफ़्ल अदा किये हों.

तो उन्हीं के द्रज़े ऊंचे {75} बसने के बाग़ जिनके नीचे नेहरे बहे हमेशा उनमें रहे, और यह सिला है उसका जो पाक हुआ (38){76}
(38) कुफ़्र की नापाकी और गुनाहों की गन्दगी से.

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