20 सूरए तॉहा -चौथा रूकू

20 सूरए   तॉहा -चौथा रूकू


और बेशक हमने मूसा को वही (देववाणी) की(1)
(1) जबकि फ़िरऔन चमत्कार देखकर राह पर न आया और नसीहत हासिल न की और बनी इस्राईल पर अत्याचार और अधिक करने लगा.

कि रातों रात मेरे बन्दों को ले चल(2)
(2) मिस्र से, और जब दरिया के किनारे पहुंचे और फ़िरऔनी लश्कर पीछे से आए तो अन्देशा न कर.

और उनके लिये दरिया में सूखा रास्ता निकाल दे(3)
(3) अपनी लाठी मार कर.

तुझे डर न होगा कि फ़िरऔन आ ले और न ख़तरा (4){77}
(4) नदी में डूबने का, मूसा अलैहिस्सलाम का हुक्म पाकर रात के पहले पहर सत्तर हज़ार बनी इस्राईल को साथ लेकर मिस्र से चल पड़े.

तो उनके पीछे फ़िरऔन पड़ा अपने लश्कर लेकर(5)
(5) जिन में छ लाख फ़िरऔनी थे.

तो उन्हें दरिया ने ढांप लिया जैसा ढांप लिया(6){78}
(6) वो डूब गए और पानी उनके सरों से उँचा हो गया.

और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को गुमराह किया और राह न दिखाई (7){79}
(7) इसके बाद अल्लाह तआला ने अपने और एहसान का ज़िक्र किया और फ़रमाया.

ऐ बनी इस्राईल, बेशक हमने तुमको तुम्हारे दुश्मन (8)
(8) यानी फ़िरऔन और उसकी क़ौम.

से निजात दी और तुम्हें तूर की दाईं तरफ़ का वादा दिया(9)
(9) कि हम मूसा अलैहिस्सलाम को वहाँ तौरात अता फ़रमाएँगे जिसपर अमल किया जाए.

और तुम पर मन्न और सलवा उतारा(10){80}
(10) तेह में और फ़रमाया.

खाओ जो पाक चीज़ें हमने तुम्हें रोज़ी दीं और उसमें ज़ियादती न करो(11)
(11) नाशुक्री और नेअमत को झुटलाकर और उन नेअमतों को गुनाहों में ख़र्च करके या एक दूसरे पर ज़ुल्म करके.

कि तुम पर मेरा गज़ब उतरे और जिस पर मेरा गज़ब उतरा बेशक वह गिरा (12){81}
(12) जहन्नम में, और हलाक हुआ.

और बेशक मैं बहुत बख़्शने वाला हूँ उसे जिसने तौबह की(13){81}
(13) शिर्क से.

और ईमान लाया और अच्छा काम किया फिर हिदायत पर रहा(14){82}
(14) आख़िर दम तक.

और तूने अपनी क़ौम से क्यों जल्दी की ऐ मूसा (15) {83}
(15) हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम जब अपनी क़ौम में से सत्तर आदमी चुन कर तौरात लेने तूर पर तशरीफ़ ले गए, फिर रब के कलाम के शौक़ में उनसे आगे बढ़ गए, उन्हें पीछे छोड़ दिया और फ़रमा दिया कि मेरे पीछे चले आओ. इसपर अल्लाह तआला ने फ़रमाया “वमा अअजलका” (क्यों जल्दी की,) तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने—

अर्ज़ की कि वो ये हैं मेरे पीछे और ऐ मेरे रब तेरी तरफ़ मैं जल्दी करके हाज़िर हुआ कि तू राज़ी हो(16){84}
(16)यानी तेरी रज़ा और ज़्यादा हो. इस आयत में इज्तिहाद का जायज़ होना साबित हुआ (मदारिक)

फ़रमाया तो हमने तेरे आने के बाद तेरी क़ौम को(17)
(17)  जिन्हें आपने हज़रत हारून अलैहिस्सलाम के साथ छोड़ा है.

बला में डाला और उन्हें सामरी ने गुमराह कर दिया(18){85}
(18) बछड़े की पूजा की दावत देकर. इस आयत में गुमराह करने की निस्बत सामरी की तरफ़ फ़रमाई गई क्योंकि वह उसका कारण हुआ. इससे साबित हुआ कि किसी चीज को कारण की तरफ़ निस्बत करना जायज़ है. इसी तरह कह सकते हैं कि माँ बाप ने पाला पोसा, दीनी पेशवाओ ने हिदायत की और वलियों ने हाजत दूर फ़रमाई, बुज़ुर्गों ने बला दूर की. मुफ़स्सिरों ने फ़रमाया है कि काम ज़ाहिर में नियत और कारण की तरफ़ जोड़ दिये जाते हैं जबकि हक़ीक़त में उनका बनाने वाला अल्लाह तआला है और क़ुरआन शरीफ़  में ऐसी निस्बतें बहुतात से आई हैं.(ख़ाज़िन)

तो मूसा अपनी क़ौम की तरफ़ पलटा (19)
(19) चालीस दिन पूरे करके तौरात लेकर.

ग़ुस्से में भरा, अफ़सोस करता(20)
(20) उनके हाल पर.

कहा ऐ मेरी क़ौम क्या तुमसे तुम्हारे रब ने अच्छा वादा न किया था(21)
(21) कि वह तौरात अता फ़रमाएगा जिसमें हिदायत है, नूर है हज़ार सूरतें हैं, हर सूरत में हज़ार आयतें हैं.

क्या तुम पर मुद्दत लम्बी गुज़री या तुमने चाहा कि तुम पर तुम्हारे रब का ग़ज़ब (प्रकोप) उतरे तो तुमने मेरा वादा खिलाफ़ किया(22){86}
(22)  और ऐसा ग़लत काम किया कि बछड़े को पूजने लगे. तुम्हारा वादा तो मुझसे यह था कि मेरे हुक्म पर चलोगे और मेरे दीन पर क़ायम रहोगे.

बोले हमने आपका वादा अपने इख़्तियार से ख़िलाफ़ न किया लेकिन हमसे कुछ बोझ उठवाए गए उस क़ौम के गहने के (23)
(23) यानी फ़िरऔनी क़ौम के ज़ेवरों के जो बनी इस्राईल ने उन लोगों से उधार मांग लिये थे.

तो हमने उन्हें (24)
(24) सामरी के हुक्म से आग में.

डाल दिया फिर इसी तरह सामरी ने डाला (25){87}
(25) उन ज़ेवरों को जो उसके पास थे और उस ख़ाक को जो हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम के घोड़े के क़दम के नीचे से उसने हासिल की थी.

तो उसने उनके लिये एक बछड़ा निकाला बेजान का धड़ गाय की तरह बोलता (26)
(26) ये बछड़ा सामरी ने बनाया और इसमें कुछ छेद इस तरह रखे कि जब उनमें हवा दाख़िल हो तो उससे बछड़े की आवाज़ की तरह आवाज़ पैदा हो. एक क़ौल यह भी है कि वह हज़रत जिब्रील के घोड़े के क़दम के नीचे की धूल डालने से ज़िन्दा हो कर बछड़े की तरह बोलता था.

तो बोले(27)
(27) सामरी और उसके अनुयायी.

यह है तुम्हारा मअबूद और मूसा का मअबूद, तो भूल गए(28){88}
(28) यानी मूसा मअबूद को भूल गए और उसको यहाँ छोड़ कर उसकी खोज में तूर पर चले गए. कुछ मुफ़स्सिरों ने कहा कि “भूल गए” का कर्ता सामरी है और मानी यह हैं कि सामरी ने जो बछड़े को मअबूद बनाया वह अपने रब को भूल गया.

तो क्या नहीं देखते कि वह (29)
(29) बछड़ा.

उन्हें किसी बात का जवाब नहीं देता और उनके किसी बुरे भले का इख़्तियार नहीं रखता(30){89}
(30) खिताब से भी मजबूर और नफ़ा नुक़सान से भी लाचार, वह किस तरह मअबूद हो सकता है.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: