19 सूरए मरयम -छटा रूकू

19 सूरए मरयम -छटा रूकू

क्या तुमने न देखा कि हमने काफ़िरों पर शैतान भेजे(1)
यानी शैतानों को उनपर छोड़ दिया और उन पर क़ब्ज़ा दे दिया.(1)

कि वो उन्हें ख़ूब उछालते हैं (2){83}
(2) और गुनाहों पर उभारते हैं.

तो तुम जल्दी न करो, हम तो उनकी गिनती पूरी करते हैं(3){84}
(3) कर्मों के बदले के लिये या सांसों की फ़ना के लिये या दिनों महीनों और बरसों की उस अवधि के लिये जो उनके अज़ाब के वास्ते निर्धारित है.

जिस दिन हम परहेज़गारों को रहमान की तरफ़ ले जाएंगे मेहमान बनाकर (4){85}
हज़रत अली मुर्तज़ा रदियल्लाहो अन्हो से रिवायत है कि ईमान वाले परहेज़गार लोग हश्र में अपनी क़ब्रों से सवार करके उठाए जाएंगे और उनकी सवारियों पर सोने की ज़ीनें और पालान होंगे.(4)

और मुजरिमों को जहन्नम की तरफ़ हांकेंगे प्यासे(5){86}
(5) ज़िल्लत और अपमान के साथ, उनके कुफ़्र के कारण.

लोग शफाअत के मालिक नहीं मगर वही जिन्होंने रहमान के पास क़रार रखा हैं(6){87}
(6) यानी जिन्हें शफ़ाअत की आज्ञा मिल चुकी है, वही शफा़अत करेंगे. या ये मानी हैं कि शफ़ाअत सिर्फ़ ईमान वालों की होगी और वही उससे फ़ायदा उठाएंगे. हदीस शरीफ़ है, जो ईमान लाया और जिसने लाइलाहा कहा उसके लिये अल्लाह के नज़दीक एहद है.

और काफ़िर बोले(7)
(7) यानी यहूदी, ईसाई और मुश्रिक जो फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटीयाँ कहते थे कि—

रहमान ने औलाद इख़्तियार की{88} बेशक तुम हद की भारी बात लाए,(8){89}
(8) और अत्यन्त बुरे और ग़लत दर्ज़ें का कलिमा तुमने मुंह से निकाला.

क़रीब है कि आसमान उस से फट पड़ें और ज़मीन शक़ हो जाए और पहाड़ गिर जाएं ढै कर(9){90}
(9) यानी ये कलिमा ऐसी बेअदबी और गुस्ताख़ी का है कि अगर अल्लाह तआला ग़ज़ब फ़रमाए तो उसपर सारे जगत का निज़ाम दरहम बरहम उलट पुलट कर दे. हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया कि काफ़िरों ने जब यह गुस्ताखी़ की और ऐसा अपमान-जनक  कलिमा मुंह से निकाला तो जिन्न और इंसानों के सिवा आसमान, ज़मीन, पहाड़ वग़ैरह तमाम सृष्टि परेशानी से बेचैन हो गई और हलाकत के क़रीब पहुंच गई. फ़रिश्तों को ग़ुस्सा आया और जहन्नम को जोश आया, फिर अल्लाह तआला ने अपनी पाकी बयान फ़रमाई.

उस पर कि उन्होंने रहमान के लिये औलाद बताई{91} और रहमान के लिये लायक़ नहीं कि औलाद इख़्तियार करे(10){92}
(10) वह इससे पाक है और उसके लिये औलाद होना मुहाल है, मुमकिन नहीं.

आसमानों और ज़मीन में जितने हैं सब उसके हुज़ूर बन्दे होकर हाज़िर होंगे(11){93}
(11) बन्दा होने का इक़रार करते हुए और बन्दा होना और औलाद होना जमा हो ही नहीं सकता और औलाद ममलूक नहीं होती, जो ममलूक है हरग़िज़ औलाद नहीं.

बेशक वह उनका शुमार जानता है और उनको एक एक करके गिन रखा है(12){94}
(12) सब उसके इल्म में हैं और हर एक की सांसे और सारे अहवाल और तमाम काम उसकी गिनती में हैं. उसपर कुछ छुपा नहीं, सब उसकी तदबीर और तक़दीर के तहत में हैं.

और उनमें हर एक क़यामत के रोज़ उसके हुज़ूर अकेला हाज़िर होगा(13){95}
(13) बग़ैर माल और औलाद और सहायक व मददगार के.

बेशक वो जो ईमान लाए और अच्छे काम किये, बहुत जल्द उनके लिये रहमान महब्बत कर देगा(14){96}
(14) यानी अपना मेहबूब बनाएगा और अपने बन्दों के दिल में उनकी महब्बत डाल देगा. बुख़ारी व मुस्लिम की हदीस में है कि जब अल्लाह तआला किसी बन्दे को अपना मेहबूब करता है तो जिब्रईल से फ़रमाता है कि अमुक मेरा महबूब है. जिब्रईल उससे महब्बत करने लगते है फिर वह आसमानों में पुकार लगाते हैं कि अल्लाह तआला इस बन्दे को मेहबूब रखता है सब इसको मेहबूब रखें तो आसमान वाले उसको मेहबूब रखते हैं फिर ज़मीन में उसकी लोकप्रियता आम कर दी जाती है. इससे मालूम हुआ कि ईमान वाले नेक बन्दे और वलियों की लोकप्रियता उनकी मेहबूबियत की दलील है. जैसे कि हुज़ूर ग़ौसे अअज़म रदियल्लाहो अन्हो और हज़रत सुल्तान निज़ामुद्दीन देहलवी और हज़रत सुल्तान सैयि्यद अशरफ़ जहांगीर सिमनानी रदियल्लाहो अन्हुम और दूसरे वलियों की लोकप्रियता उनकी मेहबूबियत की दलील है.

तो हमने यह क़ुरआन तुम्हारी ज़बान में यूंही आसान फ़रमाया कि तुम इससे डर वालों को ख़ुशख़बरी दो और झगड़ालू लोगों को इससे डर सुनाओ {97} और हमने उनसे पहले कितनी संगतें खपाई (क़ौमे हलाक कीं)(15)
(15) नबियों को झुटलाने की वजह से कितनी बहुत सी उम्मतें हलाक कीं.

क्या तुम उनमें किसी को देखते हो या उनकी भनक (ज़रा भी आवाज़) सुनते हो(16){98}
(16) वो सब नेस्तो नाबूद कर दिये गए उसी तरह ये लोग अगर वही तरीक़ा इख़्तियार करेंगे तो उनका भी वही अंजाम होगा.

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