19 सूरए मरयम -चौथा रूकू

19 सूरए  मरयम -चौथा रूकू


और किताब में मूसा को याद करो बेशक वह चुना हुआ था और रसूल था, ग़ैब की ख़बरें बताने वाला{51} और उसे हमने तूर की दाईं तरफ़ से पुकारा(1)
(1) तूर एक पहाड़ का नाम है जो मिस्र और मदयन के बीच है. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को मदयन से आते हुए तूर की उस दिशा से जो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की दाईं तरफ़ थी एक दरख़्त से पुकारा गया “या मूसा इन्नी अनल्लाहो रब्बुल आलमीन”

और अपना राज़ कहने को क़रीब किया(2){52}
(2) क़ुर्ब का दर्जा अता फ़रमाया. पर्दे उठा दिये गए यहाँ तक कि आपने सरीरे अक़लाम सुनी और आपकी क़द्रों मन्जिलत बलन्द की गई और आपसे अल्लाह तआला ने कलाम फ़रमाया.

और अपनी रहमत से उसका भाई हारून अता किया (ग़ैब की ख़बरें बताने वाला)(3){53}
(3) जबकि हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने दुआ की कि यारब, मेरे घर वालों में से मेरे भाई हारून को मेरा वज़ीर बना. अल्लाह तआला ने अपने करम से यह दुआ क़ुबूल फ़रमाई और  हज़रत हारून अलैहिस्सलाम को आपकी दुआ से नबी किया और  हज़रत हारून अलैहिस्सलाम हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से बड़े थे.

और किताब में इस्माईल को याद करो (4)
(4) जो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के बेटे और  सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के दादा हैं.

बेशक वह वादे का सच्चा था  (5)
(5) नबी सब ही सच्चे होते हैं लेकिन आप इस गुण में विशेष शोहरत रखते हैं. एक बार किसी जगह पर आप से कोई व्यक्ति कह गया कि आप यहीं ठहरीयें जब तक मैं वापस आऊं आप उस जगह उसके इन्तिज़ार में तीन रोज़ ठहरे रहे. आप ने सब्र का वादा किया था. ज़िब्ह के मौक़े पर इस शान से उसको पूरा फ़रमाया कि सुब्हानल्लाह.

और रसूल था ग़ैब की ख़बरें बताता{54}और अपने घर वालों को (6)
(6) और अपनी क़ौम जुरहम को जिन की तरफ़ आपको भेजा गया था.

नमाज़ और ज़कात का हुक्म देता और अपने रब को पसन्द था(7){55}
(7) अपनी ताअत और  सदकर्म और इस्तक़लाल और विशेष गुणों के कारण.

और किताब में इद्रीस को याद करो(8)
(8) आपका नाम अख़नूख़ है. आप हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के वालिद के दादा हैं. हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के बाद आप ही पहले रसूल हैं. आपके वालिद हज़रत शीस अलैहिस्सलाम इब्ने आदम अलैहिस्सलाम हैं. सबसे पहले जिस शख़्स ने क़लम से लिखा, वह आप ही हैं. कपड़ों के सीने और  सिले कपड़े पहनने की शुरूआत भी आप ही से हुई. आपसे पहले लोग खालें पहनते थे. सब से पहले हथियार बनाने वाले, तराज़ू और पैमाने क़ायम करने वाले और  ज्योतिष विद्या और  हिसाब में नज़र फ़रमाने वाले भी आप ही हैं. ये सब काम आप ही से शुरू हुए. अल्लाह तआला ने आप पर तीस सहीफ़े उतारे और  आसमानी किताबों के ज़्यादा पढ़ने पढ़ाने के कारण आपका नाम इद्रीस हुआ.

बेशक वह सच्चा था, ग़ैब की ख़बरें देता{56} और हमने उसे बलन्द मकान पर उठा लिया(9){57}
(9) दुनिया में उन्हें ऊंचे उलूम अता किये या ये मानी हैं कि आसमान पर उठा लिया और यही ज़्यादा सही है. बुख़ारी और मुस्लिम की हदीस में है कि सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने मेअराज की रात हज़रत इद्रीस को चौथे आसमान पर देखा. हज़रत कअब अहबार वग़ैरह से रिवायत है कि हज़रत इद्रीस अलैहिस्सलाम ने मौत के फ़रिश्ते से फ़रमाया कि मैं मौत का मज़ा चखना चाहता हूँ, कैसा होता है. तुम मेरी रूह निकाल कर दिखाओ. उन्होंने इस हुक्म की तअमील की और रूह निकाल कर उसी वक़्त आपकी तरफ़ लौटा दी. आप ज़िन्दा हो गए. फ़रमाया अब मुझे जहन्नम दिखाओ ताकि अल्लाह का ख़ौफ़ ज़्यादा हो. चुनांचे यह भी किया गया. जहन्नम देखकर आपने जहन्नम के दरोग़ा मालिक से फ़रमाया कि दर्वाज़ा खोलो मैं इसपर गुज़रना चाहता हूँ चुनांचे ऐसा ही किया गया और आप उसपर से गुज़रे. फिर आप ने मौत के फ़रिश्ते से फ़रमाया कि मुझे जन्नत दिखाओ वह आपको जन्नत में ले गए. आप दर्वाज़ा खुलवाकर जन्नम में दाख़िल हुए. थोड़ी देर इन्तिज़ार करके मौत के फ़रिश्ते ने कहा कि आप अब अपने मक़ाम पर तशरीफ़ ले चलिये. फ़रमाया अब मैं यहाँ से कहीं न जाऊंगा. अल्लाह तआला ने फ़रमाया है “कुल्लो नफ़्सिन ज़ाइक़तुल मौत” वह मैं चख ही चुका हूँ. और  यह फ़रमाया है “वइम मिनकुम इल्ला वारिदुहा” कि हर शख़्स को जहन्नम पर गुज़रना है तो मैं गुज़र चुका अब मैं जन्न्त में पहुंच गया और  जन्नत में पहुंचने वालों के लिये अल्लाह तआला ने फ़रमाया है “वमा हुम मिन्हा विमुख़रिजीन” कि वो जन्नत से न निकाले जाएंगे. अब मुझे जन्नत से चलने को क्यों कहते हो. अल्लाह तआला ने मलकुल मौत को वही फ़रमाई कि इद्रीस ने जो कुछ किया मेरी इजाज़त से किया और वह मेरी इजाज़त से जन्नत में दाख़िल हुए. उन्हें छोड़ दो वह जन्नत ही में रहेंगे. चुनांचे आप वहाँ ज़िन्दा हें.

ये हैं जिन पर अल्लाह ने एहसान किया ग़ैब की ख़बरें बताने वालों में से आदम की औलाद से ,(10)
(10) यानी हज़रत इद्रीस और हज़रत नूह.

और उनमें जिनको हमने नूह के साथ सवार किया था(11)
(11)यानी इब्राहीम अलैहिस्सलाम जो हज़रत इसहाक़ व हज़रत यअक़ूब.

और इब्राहीम (12)
(12) की औलाद से हज़रत इस्माईल व हज़रत इसहाक़ व हज़रत यअक़ूब.

और यअक़ूब की औलाद से(13)
(13) हज़रत मूसा और हज़रत हारून और हज़रत ज़करिया और हज़रत यहया और हज़रत ईसा इलैहिस्सुलाम.

और उनमें से जिन्हें हमने राह दिखाई और चुन लिया,(14)
(14) शरीअत की व्याख्या और हक़ीक़त खोलने के लिये.

जब उनपर रहमान की आयतें पढ़ी जाती, गिर पड़ते सज्दा करते और रोते(15) {58}
(15) अल्लाह तआला ने इन आयतों मे ख़बर दी कि अम्बिया अल्लाह तअला की आयतों को सुनकर गिड़गिड़ा कर ख़ौफ़ से रोते और सज्दे करते थे. इससे साबित हुआ कि क़ुरआन शरीफ़ दिल लगाकर सुनना और रोना मुस्तहब है.

तो उनके बाद उनकी जगह वो नाख़लफ़ आए(16)
(16) यहूदियों और ईसाइयों वग़ैरह की तरह.

जिन्होंने नमाज़ें गवाई और अपनी ख़्वाहिशों के पीछे (17)
(17) और अल्लाह की फ़रमाँबरदारी की जगह गुनाहों को इख़्तियार किया.

तो बहुत जल्द वो दोज़ख़ में ग़ई का जंगल पाएंगे (18){59}
(18) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया “ग़ई जहन्नम में एक घाटी है जिसकी गर्मी से जहन्नम की दूसरी वादियाँ भी पनाह मांगती हैं. यह उन लोगों के लिये है जो ज़िना के आदी और उसपर अड़े हों जो शराब के आदी हों और जो सूद खाने वाले हों और जो माँ बाप की नाफ़रमानी करने वाले हों और जो झूठी गवाही देने वाले हों.

मगर जिन्होंने तौबह की और ईमान लाए और अच्छे काम किये तो ये लोग जन्नत में जाएंगे और उन्हें कुछ नुक़सान न दिया जाएगा (19){60}
(19) और उनके कर्मों के बदले में कोई कमी न की जाएगी.

बसने के बाग़ जिनका वादा रहमान ने अपने (20)
(20) ईमानदार नेक और तौबह करने वाले.

बन्दों से ग़ैब में किया,(21)
(21) यानी इस हाल में कि जन्नत उनसे ग़ायब है उनकी नज़र के सामने नहीं या इस हाल में कि वो जन्नत से ग़ायब हैं उसका मुशाहिदा या अवलोकन नहीं करते.

बेशक उसका वादा आने वाला है{61} वो उसमें कोई बेकार बात न सुनेंगे मगर सलाम, (22)
(22) फ़रिश्तों का या आपस में एक दूसरे का.

और उन्हें उसमें उनका रिज़्क है सुबह शाम(23){62}
(23) यानी हमेशा, क्योंकि जन्नत में रात और दिन नहीं हैं. जन्नत वाले हमेशा नूर ही में रहेंगे. या मुराद यह है कि दुनिया के दिन की मिक़दार में दो बार जन्नती नेअमतें उनके सामने पेश की जाएंगी.

यह वह बाग़ है जिसका वारिस हम अपने बन्दों में से उसे करेंगे जो परहेज़गार हैं{63} (और जिब्राईल ने मेहबूब से अर्ज़ की)(24)
(24) बुख़ारी शरीफ़ में हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा से रिवायत है कि सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने जिब्रईल से फ़रमाया ऐ जिब्रईल जितना तुम हमारे पास आया करते हो इस से ज़्यादा क्यों नहीं आते. इस पर यह आयत उतरी.

हम फ़रिश्ते नहीं उतरते मगर हुज़ूर के रब के हुक्म से उसी का है जो हमारे आगे है और जो हमारे पीछे और जो उसके बीच है,(25)
(25) यानी तमाम मकानों का वही मालिक है. हम एक मकान से दूसरे मकान की तरफ़ नक़्लों हरकत करने में उसके हुक्म और मर्ज़ी के अन्तर्गत हैं. वह हर हरकत और सुकून का जानने वाला और ग़फ़लत और भूलचूक से पाक हैं.

और  हुज़ूर का रब भूलने वाला नहीं(26){64}
(26) जब चाहे हमें आपकी ख़िदमत में भेजे.

आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनके बीच में है सब का मालिक तो उसे पूजो और उसकी बन्दगी पर साबित रहो, क्या उसके नाम का दूसरा जानते हो(27){65}
(27) यानी किसी को उसके साथ नाम की शिरकत भी नहीं और उसका एक होना इतना ज़ाहिर है कि मुश्रिकों ने भी अपने किसी मअबूदे बातिल का नाम अल्लाह नहीं रखा.

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