17 सूरए बनी इस्राईल – तीसरा रूकू

17 सूरए  बनी इस्राईल – तीसरा रूकू

और तुम्हारे रब ने हुक्म फ़रमाया कि उसके सिवा किसी को न पूजो और  माँ बाप के साथ अच्छा सुलूक करो, अगर तेरे सामने उनमें एक या दोनो बुढ़ापे को पहुंच जाए(1)
(1) कमज़ोरी बढ़े, शरीर के अंगों में क़ुव्वत न रहे और जैसा तू बचपन में उनके पास बेताक़त था ऐसे ही वो उम्र के आख़िर में तेरे पास कमज़ोर रह जाएं.

तो उनसे हूँ न कहना (2){23}
(2) यानी कोई ऐसा कलिमा ज़बान से न निकालना जिसे यह समझा जाए कि उनकी तरफ़ से तबियत पर कुछ बोझ है.

और उन्हें न झिड़कना और  उनसे तअज़ीम (आदर) की बात कहना (3)
(3) और  बहुत ज़्यादा अदब के साथ उनसे बात करना. माँ बाप को उनका नाम लेकर न पुकारे, यह अदब के ख़िलाफ़ है. और इसमें उनके दिल दुखने का डर है. लेकिन  वो सामने न हों तो उनका नाम लेकर ज़िक्र करना जायज़ है. माँ बाप से इस तरह कलाम करे जैसे ग़ुलाम और सेवक अपने मालिक से करता हैं.

 और उनके लिये आजिज़ी (नम्रता) का बाज़ू बिछा(4)
(4) यानी विनम्रता और मेहरबानी और  झुककर पेश आ और उनके साथ थके वक़्त में शफ़क़त व महब्बत का व्यवहार कर कि उन्हों ने तेरी मजबूरी के वक़्त तुझे प्यार दुलार से पाला था. और  जो चीज़ उन्हें दरकार हो वह उनपर ख़र्च करने में पीछे मत हट…

नर्म दिली से और  अर्ज़ कर कि ऐ मेरे रब, तू इन दोनों पर रहम कर जैसा कि इन दोनो ने मुझे छुटपन में पाला(5){24}
(5) मतलब यह है कि दुनिया में बेहतर सुलूक और ख़िदमत को कितना भी बढ़ाया जाए, लेकिन माँ बाप के एहसान का हक़ अदा नहीं होता. इसलिये बन्दे को चाहिये कि अल्लाह की बारगाह में उनपर फ़ज़्ल व रहमत फ़रमाने की दुआ करे और  अर्ज़ करे कि यारब मेरी ख़िदमतें उनके एहसान का बदला नहीं हो सकतीं, तू उनपर करम कर कि उनके एहसान का बदला हो. इस आयत से साबित हुआ कि मुसलमान के लिये रहमत और  मग़फ़िरत की दुआ जायज़ और  उसे फ़ायदा पहुंचाने वाली है. मुर्दों के ईसाले सवाब में भी उनके लिये रहमत की दुआ होती है, लिहाज़ा इसके लिये यह आयत अस्ल है. माँ बाप काफ़िर हों तो उनके लिये हिदायत और  ईमान की दुआ करे कि यही उनके हक़ में रहमत है. हदीस शरीफ़ में है कि माँ बाप की रज़ामन्दी में अल्लाह तआला की रज़ा और  उनकी नाराज़ी में अल्लाह तआला की नाराज़ी है. दूसरी हदीस में है, माँ बाप की आज्ञा का पालन करने वाला जहन्नमी न होगा और उनका नाफ़रमान कुछ भी अमल करे, अज़ाब में जकड़ा जाएगा, एक और हदीस में है, सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया माँ बाप की नाफ़रमानी से बचो इसलिये कि जन्नत की ख़ुश्बू हज़ार बरस की राह तक आती है और नाफ़रमान वह ख़ुश्बू न पाएगा, न सगे रिश्तों को तोड़ने वाला, न बूढ़ा बलात्कार, न घमण्ड से अपनी इज़ार टखनों से नीचे लटकाने वाला.

तुम्हारा रब ख़ूब जानता है जो तुम्हारे दिलों में है(6)
(6) माँ बाप की फ़रमाँबरदारी का इरादा और उनकी ख़िदमत का शौक़.

अगर तुम लायक़ हुए (7)
(7) और तुम से माँ बाप की ख़िदमत में कमी वाक़े हुई तो तुमने तौबह की.

तो बेशक वह तौबह करने वाले को बख़्शने वाला है{25} और  रिश्तेदारों को उनका हक़ दे(8)
(8) उनके साथ मेहरबानी करो और महब्बत और मेल जोल  ख़बरगीरी और  मौक़े पर मदद और अच्छा सुलूक. और अगर वो मेहरमों में से हो और मोहताज हो जाएं तो उनका ख़र्च उठाना, यह भी उनका हक़ है. और  मालदार रिश्तेदार पर लाज़िम है. कुछ मुफ़स्सिरों ने इस आयत की तफ़सीर में कहा है कि रिश्तेदारों से सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के साथ रिश्ते रखने वाले मुराद हैं और  उनका हक़ यानी पाँचवा हिस्सा देना और उनका आदर सत्कार करना है.

और मिस्कीन और मुसाफ़िर को(9)
(9) उनका हक़ दो यानी जक़ात.

और फ़ुज़ूल न उड़ा(10){26}
(10) यानी नाज़ायज़ काम में ख़र्च न कर. हज़रत इब्ने मसऊद रदियल्लाहो अन्हो ने फ़रमाया कि “तबज़ीर” माल का नाहक़ में ख़र्च करना है.

बेशक उड़ाने वाले शैतानों के भाई हैं(11)
(11) कि उनकी राह चलते हैं.

और शैतान अपने रब का बड़ा नाशुक्रा है(12){27}
(12) तो उसकी राह इख़्तियार करना न चाहिये.

और अगर तू उनसे(13)
(13) यानी रिश्तेदारों और  मिस्कीनों और  मुसाफ़िरों से. यह आयत मेहजअ व बिलाल व सुहैब व सालिम व ख़ब्बाब सहाबए रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शान में उतरी जो समय समय पर सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से अपनी ज़रूरतों की पूर्ति के लिये कुछ न कुछ मांगते रहते थे. अगर किसी वक़्त हुज़ूर के पास कुछ न होता तो आप हया से उनका सामना न करते और ख़ामोश हो जाते इस इन्तिज़ार में कि अल्लाह तआला कुछ भेजे तो उन्हें अता फ़रमाएं.

मुंह फेरे अपने रब की रहमत के इन्तिज़ार में जिसकी तुझे उम्मीद है तो उनसे आसान बात कह(14){28}
(14) यानी उनकी ख़ुशदिली के लिये, उनसे वादा कीजिये या उनके हक़ में दुआ फ़रमाइये.

और  अपना हाथ अपनी गर्दन से बंधा हुआ न रख और न पूरा खोल दे कि तू बैठ रहे मलामत किया हुआ थका हुआ(15) {29}
(15) यह मिसाल है जिससे ख़र्च करने में मध्यमार्ग पर चलने की हिदायत मंज़ूर है और  यह बताया जाता है कि न तो इस तरह हाथ रोको कि बिलकुल ख़र्च ही न करो और यह मालूम हो गया कि हाथ गले से बांध दिया गया है, देने के लिये हिल ही नहीं सकता. ऐसा करना तो मलामत का कारण होता है कि कंजूस को सब बुरा कहते हैं. और  न ऐसा हाथ खोलो कि अपनी ज़रूरतों के लिये भी कुछ बाक़ी न रहे. एक मुसलमान बीबी के सामने एक यहूदी औरत ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की सख़ावत का बयान किया और उसमें इस हद तक बढ़ा चढ़ा कर कहा कि हज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से बढ़कर बता दिया और  कहा कि हज़रत मूसा कि सख़ावत इस इन्तिहा पर पहुंची हुई थी कि अपनी ज़रूरतों के अलावा जो कुछ भी उनके पास होता, मांगने वाले को देने से नहीं हिचकिचाते. यह बात मुसलमान बीबी को नागवार गुज़री और उन्होंने कहा कि सारे नबी बुज़ुर्गी व कमाल वाले हैं. हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की उदारता और  सख़ावत में कुछ संदेह नहीं, लेकिन सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का दर्जा सबसे ऊंचा है और यह कहकर उन्होंने चाहा कि हज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की सख़ावत और करम की आज़माइश उस यहूदी औरत को कर दी जाए चुनांचे उन्होंने अपनी छोटी बच्ची को भेजा कि हुज़ूर से क़मीज़ माँग लाए. उस वक़्त हुज़ूर के पास एक ही क़मीज़ थी जो आप पहने हुए थे, वही उतार कर अता फ़रमा दी और  आप ने मकान के अन्दर तशरीफ़ रखी. शर्म से बाहर न आए यहाँ तक कि अज़ान का वक़्त हो गया. अज़ान हुई. सहाबा ने इन्तिज़ार किया, हुज़ूर तशरीफ़ न लाए तो सबको फ़िक्र हुई. हाल मालूम करने के लिये सरकार के मुबारक मकान में हाज़िर हुए तो देखा कि पाक बदन पर क़मीज़ नहीं हैं. इसपर यह आयत उतरी.

बेशक तुम्हारा रब जिसे चाहे रिज़्क कुशादा देता और  (16)
(16) जिसे चाहे उसके लिये तंगी करता और  उसको.

कस्ता है, बेशक वह अपने बन्दों को ख़ूब जानता(17)
(17) और  उनकी हालतों और  मसलिहतों को.
देखता है{30}

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: