16 सूरए नहल -सातवाँ रूकू

16 सूरए  नहल  -सातवाँ रूकू

अल्लाह ने फ़रमा दिया दो ख़ुदा न ठहराओ(1)
(1) क्योंकि दो ख़ुदा तो हो ही नहीं सकते.

वह तो एक ही मअबूद है तो मुझी से डरो(2){51}
(2) में ही वह बरहक़ और सच्चा मअबूद हूँ जिसका कोई शरीक नहीं.

और उसी का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है और उसी की फ़रमाँबरदारी अनिवार्य है, तो क्या अल्लाह के सिवा किसी दूसरे से डरोगे(3){52}
(3) इसके बावुज़ूद कि सच्चा मअबूद सिर्फ़ वही है.

और तुम्हारे पास जो नेअमत है सब अल्लाह की तरफ़ से है फिर जब तुम्हें तक़लीफ़ पहुंचती है(4)
(4)चाहे फ़्रक्र की, या मर्ज़ की, या और कोई.

तो उसी की तरफ़ पनाह ले जाते हो(5){53}
(5) उसी से दुआ मांगते हो, उसी से फ़रियाद करते हो.

फिर जब वह तुम से बुराई टाल देता है तो तुममें एक गिरोह अपने रब का शरीक ठहराने लगता है(6){54}
(6) और उन लोगों का अंजाम यह होता है.

कि हमारी दी हुई नेअमतों की नाशुक्री करें तो कुछ बरत लो(7)
(7) और कुछ रोज़ इस हालत में ज़िन्दग़ी गुज़ार लो.

कि बहुत जल्द जान जाओगे(8){55}
(8)  कि उसका नतीजा क्या हुआ.

और अनजानी चीज़ों के लिये(9)
(9) यानी बुतों के लिये जिनका मअबूद और नफ़ा नुक़सान पहुंचाने वाला होना उन्हें मालूम नहीं.

हमारी दी हुई रोज़ी में से(10)
(10)  यानी खेतियों और चौपायों वग़ैरह में से.

हिस्सा मुक़र्रर करते हैं, ख़ुदा की क़सम तुम से ज़रूर सवाल होना है जो कुछ झूट बांधते थे(11){56}
(11) बुतों को मअबूद और क़ुर्बत देने वाले और बुत परस्ती को ख़ुदा का हुक्म बताकर.

और अल्लाह के लिये बेटियां ठहराते हैं (12)
(12) जैसे कि ख़ुज़ाअह और कनानह कहते थे कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं.

पाकी है उसको(13)
(13) वह बरतर है औलाद से और उसकी शान में ऐसा कहना निहायत बेअदबी और कुफ़्र है.

और अपने लिये जो अपना जी चाहता है(14){57}
(14) यानी कुफ़्र के साथ, यह हद से ज़्यादा बदतमीज़ी भी है कि अपने लिये बेटे पसन्द करते हैं और बेटियाँ नापसन्द करते हैं और अल्लाह तआला के लिये, जो मुतलक़ औलाद से पाक है, औलाद का साबित करना ऐब लगाना है, उसके लिये औलाद में भी वह साबित करते हैं जिस को अपने लिये तुच्छ और शर्म का कारण मानते हैं.

और जब उनमें किसी को बेटी होने की ख़ुशख़बरी दी जाती है तो दिन भर उसका मुंह(15)
(15) ग़म से.

काला रहता है और वह ग़ुस्सा खाता है{58} लोगो से(16)
(16) शर्म के मारे.

छुपता फिरता है उस बशारत की बुराई के कारण, क्या उसे ज़िल्लत के साथ रखेगा या उसे मिट्टी में दबा देगा(17)
(17) जैसा कि मुदर व ख़ुज़ाअह और तमीम के काफ़िर लड़कियों को ज़िन्दा गाड़ देते थे.

अरे बहुत ही बुरा हुक्म लगाते हैं(18){59}
(18) कि अल्लाह तआला के लिये बेटियाँ साबित करते हैं जो अपने लिये उन्हें इस क़द्र नागवार हैं.

जो आख़िरत पर ईमान नहीं लाते उन्हीं का बुरा हाल है और अल्लाह की शान सबसे बुलन्द(19)
(19) कि वह वालिद और वलद सबसे पाक और मुनज़्ज़ है, कोई उसका शरीक नहीं, जलाल और कमाल की सारी विशेषताओं का मालिक.
और वही इज़्ज़त व हिकमत वाला है{60}

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