सूरए हिज्र -पांचवाँ रूकू

सूरए हिज्र -पांचवाँ रूकू


तो जब लूत के घर फ़रिश्ते आए (1){61}
(1) ख़ूबसूरत नौज़वानों की शक्ल में. हज़रत लूत अलैहिस्सलाम को डर हुआ की क़ौम उनके पीछे पड़ जाएगी, तो आपने फ़रिश्तों से….

 कहा तुम तो कुछ बेगाने लोग हो (2){63}
(2) न तो यहाँ के निवासी हो, न कोई मुसाफ़िरत की निशानी तुम में पाई जाती है. क्यों आए हो, फ़रिश्तों ने…..

कहा बल्कि हम तो आपके पास वह (3)
(3) अज़ाब जिसके उतरने का आप अपनी क़ौम को ख़ौफ़ दिलाया करते थे.

लाए हैं जिसमें ये लोग शक करते थे(4){63}
(4) और आपको झुटलाते थे.

और हम आपके पास सच्चा हुक्म लाए हैं और बेशक हम सच्चे हैं {64} तो अपने घर वालों को कुछ रात रहे लेकर बाहर जाइये और आप उनके पीछे चलिये और तुम में कोई पीछे फिर कर देखे(5)
(5) कि क़ौम पर क्या बला नाज़िल हुई और वो किस अज़ाब में जकड़े गये.

और जहां को हुक्म है सीधे चले जाइये (6){65}
(6) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया कि हुक्म शाम प्रदेश को जाने का था.

और हमने उसे उस हुक्म का फैसला सुना दिया कि सुबह होते इन काफ़िरों की जड़ कट जाएगी(7){66}
(7) और तमाम क़ौम अज़ाब से हलाक कर दी जाएगी.

और शहर वाले(8)
(8) यानी सदूम शहर के रहने वाले हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम के लोग. हज़रत लूत के यहाँ ख़ूबसूरत नौज़वानों के आने की ख़बर सुनकर ग़लत इरादे और नापाक नियत से.

ख़ुशियां मनाते आए {67} लूत ने कहा ये मेरे मेहमान हैं(9)
(9) और मेहमान का सत्कार लाज़िम होता है, तुम उनके निरादर का इरादा करके.

मुझे फ़जीहत न करो(10){68}
(10)कि मेहमान की रूसवाई मेज़बान के लिये ख़िजालत और शर्मिन्दगी का कारण होती है.

और अल्लाह से डरो और मुझे रूस्वा न करो (11){69}
(11) उनके साथ बुरा इरादा करके. इसपर क़ौम के लोग हज़रत लूत अलैहिस्सलाम से.

बोले क्या हमने तुम्हें मना न किया था कि औरों के मामले में दख़्ल न दो{70}कहा ये क़ौम की औरतें मेरी बेटियां हैं अगर तुम्हें करना है(12){71}
(12) तो उनसे निकाह करो और हराम से बाज़ रहो. अब अल्लाह तआला अपने हबीब सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से फ़रमाता है.

ऐ मेहबूब तुम्हारी जान की क़सम (13)
(13) और अल्लाह की सृष्टि में से कोई जान अल्लाह की बारगाह में आपकी पाक जान की तरह इज़्ज़त और पाकी नहीं रखती और अल्लाह तआला ने सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की उम्र के सिवा किसी की उम्र और ज़िन्दगी की क़सम याद नहीं फ़रमाई. यह दर्जा सिर्फ हुज़ूर ही का है. अब इस क़सम के बाद इरशाद होता है.

बेशक वो अपने नशे में भटक रहे हैं {72} तो दिन निकलते उन्हें चिंघाड़ ने आ लिया (14){73}
(14) यानी हौलनाक और भयानक आवाज़ ने.

तो हमने उस बस्ती का ऊपर का हिस्सा उसके नीचे का हिस्सा कर दिया(15)
(15) इस तरह की हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम उस ज़मीन के टुकड़े को उठाकर आसमान के क़रीब ले गए और वहाँ से औंधा करके ज़मीन पर डाल दिया.

और उनपर कंकर के पत्थर बरसाए{74} बेशक उसमें निशानियां हैं समझ वालों के लिये {75} और बेशक वह बस्ती उस राह पर है जो अब तक चली है(16){76}
(16) और क़ाफ़िले उसपर गुज़रते हैं और अल्लाह के ग़ज़ब के निशान उनके देखने में आते हैं.

बेशक उसमें निशानियां हैं ईमान वालों को {77} और बेशक झाड़ी वाले ज़रूर ज़ालिम थे (17){78}
(17) यानी क़ाफ़िर थे. ऐका का झाड़ी को कहते है. इन लोगों का शहर हरे भरे जंगलों और हरियालियों के बीच था. अल्लाह तआला ने हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम को उन पर रसूल बना कर भेजा. उन लोगो ने नाफ़रमानी की, और हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम को झुटलाया.

 तो हमने उनसे बदला लिया(18)
(18) यानी अज़ाब भेजकर हलाक किया.

और बेशक ये दोनो बस्तियाँ (19)
(19) यानी क़ौमे लूत के शहर और ऐका वालों के..

खुले रास्ते पर पड़ती हैं (20){79}
(20) जहाँ आदमी गुजरते हैं और देखते हैं तो ऐ मक्का वालों तुम उनको देखकर क्यों सबक नहीं पकड़ते.

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