सूरए – दूसरा रूकू

सूरए   – दूसरा रूकू

और बेशक हमने आसमान मे बुर्ज बनाए(1)
(1) जो गर्दिश (भ्रमण) करने वाले ग्रहों की मंज़िलें हैं, वे बारह हैं. हमल(मेष), सौर (वृषभ), जौज़ा(मिथुन), सरतान(कर्क), असद (सिंह), सम्बला(कन्या), मीज़ान(तुला), अक़रब (वृश्चिक), कौस (धनु), जदी(मकर), दलव(कुम्भ), हूत(मीन).

और उसे देखने वालों के लिये आरास्ता किया(2){16}
(2) सितारों से.

और उसे हमने हर शैतान मरदूद से मेहफ़ूज़ रखा(3){17}
(3) हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया, शैतान आसमानों में दाख़िल होते थे और वहाँ की ख़बरें ज्योतिषियों के पास लाते थे. जब हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम पैदा हुए तो शैतान तीन आसमानों से रोक दिये गये. जब सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की विलादत हुई तो तमाम आसमानों से रोक दिये गये.

मगर जो चोरी छुपे सुनने जाए तो उसके पीछे पड़ता है रौशन शोला(4){18}
(4) शहाब उस सितारे को कहते हैं जो शोले की तरह रौशन होता है और फ़रिश्तें उससे शैतान को मारते हैं.

और हमने ज़मीन फैलाई और उसमें लंगर डाले (5)
(5) पहाड़ों के, ताकि वो सलामत और स्थिर रहे और हरकत न करे.

और उसमें हर चीज़ अंदाज़े से उगाई{19} और तुम्हारे लिये उसमें रोज़ियां कर दीं(6)
(6) ग़ल्ले, फल वग़ैरह.

और वो कर दिये जिन्हें तुम रिज़्क़ नहीं देते(7){20}
(7) दासी, ग़ुलाम, चौपाए और सेवक वग़ैरह.

और कोई ची़ज़ नहीं जिसके हमारे पास ख़ज़ाने न हो(8)
(8) ख़ज़ाने होना, यानी इक़्तिदार, सत्ता और इख़्तियार मानी ये हैं कि हम हर चीज़ के पैदा करने पर क़ादिर है जितनी चाहें और जो अन्दाज़ा हिकमत के मुताबिक हो.

और हम उसे नहीं उतारते मगर एक मालूम अंदाज़ से{21}और हम ने हवाएं भेजीं बादलों को बारवर (फलदायक) करने वालियाँ (9)
(9) आबादियों को पानी से भरती और सैराब करती हैं

तो हमने आसमान से पानी उतारा फिर वह तुम्हें पीने को दिया और तुम कुछ उसके ख़ज़ानची नहीं (10){22}
(10) कि पानी तुम्हारे इख़्तियार में हो, जबकि तुम्हें इसकी हाजत है. इसमें अल्लाह तआला की क़ुदरत और बन्दों की विवशता की बड़ी दलील है.

और बेशक हम ही जिलाएं और हम ही मारें और हम ही वारिस हैं (11){23}
(11) यानी सारी सृष्टि नष्ट होने वाली हैं और हम ही बाकी रहने वालें हैं और मुल्क का दावा करने वाले की मिल्क ज़ाया (नष्ट) हो जाएगी और सब मालिकों का मालिक बाक़ी रहेगा.

और बेशक हमें मअलूम हैं जो तुम में आगे बढ़े और बेशक हमें मअलूम है जो तुम में पीछे रहे(12){24}
(12) यानी पहली उम्मतें और उम्मतें मुहम्मदिया, जो उम्मतों में सबसे पिछली है या वो जो ताअत  और भलाई में पहल करने वाले हैं और जो सुस्ती से पीछे रह जाते वाले हैं या वो जो बुज़ुर्गी हासिल करने के लिये आगे बढ़ने वाले हैं और वो जो उज्र से पीछे रह जाने वाले हैं. हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा से रिवायत है कि नबीये करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने नमाज़ की जमाअत की पहली सफ़ की अच्छाईयाँ बयान की, तो सहाबा में पहली सफ़ में शामिल होने की होड़ लगी और उनकी भीड़ होने लगी. जिन लोगो के मकान मस्जिद शरीफ़ से दूर थे, वो अपने मकान बेचकर क़रीब में मकान ख़रीदने की कोशिश करने लगे ताकि पहली सफ़ में जगह मिलने से कभी मेहरूम न हो. इसपर यह आयत उतरी और उन्हें तसल्ली दी गई कि सवाब नियतों पर है और अल्लाह तआला अगलो को भी जानता है और जो उज्र से पीछे रह गए हैं उनको भी जानता है और उनकी नियतों से भी बाख़बर है और उसपर कुछ छुपा हुआ नहीं हैं.

और बेशक तुम्हारा रब ही उन्हें क़यामत मे उठाएगा(13)बेशक वही इल्म व हिकमत वाला है{25}
(13) जिस हाल पर वो मरे होंगे.

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