सूरए इब्राहीम-तीसरा रूकू

सूरए  इब्राहीम-तीसरा रूकू



और काफ़िरों ने अपने रसूलों से कहा हम ज़रूर तुम्हें अपनी ज़मीन (1)
(1) यानी अपने इलाक़े.

से निकाल देंगे या तुम हमारे दीन पर हो जाओ, तो उन्हें उनके रब ने वही (देववाणी) भेजी कि हम ज़रूर इन ज़ालिमों को हलाक करेंगे{13} और ज़रूर हम तुमको उनके बाद ज़मीन में बसाएंगे(2)
(2) हदीस शरीफ़ में है, जो अपने हमसाए को तक़लीफ़ देता है अल्लाह उसके घर का उसी हमसाए को मालिक बनाता है.

यह उसके लिये है जो(3)
(3) क़यामत के दिन.

मेरे हुज़ूर खड़े होने से डरे और मैं ने जो अज़ाब का हुक्म सुनाया है उससे ख़ौफ़ करे{14} और उन्होंने(4)
(4) यानी नबियों ने अल्लाह तआला से मदद तलब की या उम्मतों ने अपने और रसूलों के बीच अल्लाह तआला से.

फ़ैसला मांगा और हर सरकश हटधर्म नामुराद हुआ(5){15}
(5) मानी ये हैं कि नबियों की मदद फ़रमाई गई और उन्हें विजय दी गई और सच्चाई के दुश्मन सरकश काफ़िर नामुराद हुए और उनके छुटकारे की कोई सबील न रही.

जहन्नम उसके पीछे लगा और उसे पीप का पानी पिलाया जाएगा{16} मुश्किल से उसका थोड़ा थोड़ा घूंट लेगा और गले से नीचे उतारने की उम्मीद न होगी(6)
(6) हदीस शरीफ़ में है कि जहन्नमी को पीप का पानी पिलाया जाएगा जब वह मुंह के पास जाएगा तो उसको बहुत नागवार मालूम होगा. जब और क़रीब होगा तो उससे चेहरा भुन जाएगा और सर तक की ख़ाल जल कर गिर पड़ेगी. जब पियेगा तो आंते कट कर निकल जाएंगी. (अल्लाह की पनाह)

और उसे हर तरफ़ से मौत आएगी, और मरेगा नहीं और उसके पीछे एक गाढ़ा अज़ाब(7){17}
(7) यानी हर अज़ाब के बाद उससे ज़्यादा सख़्त और बुरा अज़ाब होगा. (अल्लाह की पनाह दोज़ख़ के अज़ाब से और अल्लाह की ग़ज़ब से).

अपने रब से इन्कारीयों का हाल ऐसा है कि उनके काम हैं(8)
(8) जिनको वो नेक काम समझते थे जैसे कि मोहताजों की मदद, मुसाफ़िरों की सहायता और बीमारों की ख़बरगीरी वग़ैरह, चूंकि ईमान पर मबनी नहीं इसलिये वो सब बेकार हैं और उनकी ऐसी मिसाल है.

जैसे राख कि उस पर हवा का सख़्त झौंका आया आंधी के दिन में(9)
(9) और वह सब उड़ गई और उसके कण बिखर गए और उसमें कुछ बाक़ी न रहा. यही हाल है काफ़िरों के कर्मों का कि उनके शिर्क और कुफ़्र की वजह से सब बर्बाद और बातिल हो गए.

सारी कमाई में से कुछ हाथ न लगा, यही है दूर की गुमराही{18} क्या तूने न देखा कि अल्लाह ने आसमान व ज़मीन हक़ के साथ बनाए(10)
(10) उनमें बड़ी हिकमतें हैं और उनकी पैदाइश बेकार नहीं है.

अगर चाहे तो तुम्हें ले जाए(11)
(11) शून्य कर दे, ख़त्म कर दे.

और एक नई मख़लूक़ (प्राणी-वर्ग) ले आए (12){19}
(12) बजाय तुम्हारे जो फ़रमाँबरदार हो, उसकी क़ुदरत से यह क्या दूर है जो आसमान और ज़मीन पैदा करने पर क़ादिर है.

और यह(13)
(13) ख़त्म करना और मौजूद फ़रमाना.

अल्लाह पर कुछ दुशवार नहीं {20} और सब अल्लाह के हुज़ूर (14)
(14) क़यामत के दिन.

खुल्लम खुल्ला हाज़िर होंगे तो जो कमज़ोर थे(15)
(15) और दौलतमन्दों और प्रभावशाली लोगों के अनुकरण में उन्होंने कुफ़्र किया था.

बड़ाई वालों से कहेंगे(16)
(16) कि दीन और अक़ीदों में.

हम तुम्हारे ताबे थे क्या तुम से हो सकता है कि अल्लाह के अज़ाब में से कुछ हम पर से टाल दो,(17)
(17)  यह कलाम उनका फटकार और दुश्मनी के तौर पर होगा कि दुनिया में तुम ने गुमराह किया था और सीधी राह से रोका था और बढ़ बढ़ कर बातें किया करते थे अब वो दावे क्या हुए. अब उस अज़ाब में से ज़रा सा तो टालो. काफ़िरों के सरदार इसके जवाब में.

कहेंगे अल्लाह हमें हिदायत करता तो हम तुम्हें करते,(18)
(18)  जब ख़ुद ही गुमराह हो रहे थे तो तुम्हें क्या राह दिखाते. अब छुटकारे की कोई राह नहीं हैं न काफ़िरों के लिये शफ़ाअत. आओ रोएं और फ़रियाद करें. पांच सौ बरस फ़रियाद करेंगे, रोएंगे और कुछ काम न आएगा तो कहेंगे कि अब सब्र करके देखो शायद उससे कुछ काम निकले. पांच सौ बरस सब्र करेंगे, वह भी काम न आएगा तो कहेंगे कि.

हम पर एक सा है चाहे बेक़रारी करें या सब्र से रहें हमें कहीं पनाह नहीं{21}

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