सूरए इब्राहीम -छटा रूकू

सूरए इब्राहीम -छटा रूकू

और  याद करो जब इब्राहीम ने अर्ज़ की ऐ मेरे रब इस शहर(1)
(1) मक्कए मुकर्रमा.

को अमान वाला कर दे(2)
(2) कि क़यामत के क़रीब दुनिया के वीरान होने के वक़्त तक यह वीरानी से मेहफ़ूज़ रहे या इस शहर वाले अम्न में हों. हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की यह दुआ क़ुबूल हुई. अल्लाह तआला ने मक्कए मुकर्रमा को वीरान होने से अम्न दिया और कोई भी उसके वीरान करने पर क़ादिर न हो सका. उसको अल्लाह तआला ने हरम बनाया कि उसमें न किसी इन्सान का ख़ून बहाया जाए न किसी पर ज़ुल्म किया जाए, न वहाँ शिकार मारा जाए, न सब्ज़ा काटा जाए.

और मुझे मेरे बेटों को बुतों के पूजने से बचा(3){35}
(3) अल्लाह के नबी अलैहिस्सलाम बुत परस्ती और तमाम गुनाहों से मअसूम है. हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का यह दुआ करना अल्लाह की बारगाह में विनम्रता और हाजत के इज़हार के लिये है कि हालांकि तूने अपने करम से मअसूम किया लेकिन हम तेरे फ़ज़्ल व रहम की तरफ़ हाजत का हाथ फैलाए रखते हैं.

ऐ मेरे रब बेशक बूतों ने बहुत लोग बहका दिये(4)
(4) यानी उनकी गुमराही का सबब हुए कि वो उन्हें पूजने लगे.

तो जिसने मेरा साथ दिया(5)
(5) और मेरे अक़ीदे और दीन पर रहा.

वह तो मेरा है और जिसने मेरा कहा न माना तो बेशक तू बख़्शने वाला मेहरबान है(6){36}
(6) चाहे तो उसे हिदायत करे और तौबह की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए.

ऐ मेरे रब मैं ने अपनी कुछ औलाद एक नालें में बसाई जिसमें खेती नहीं होती तेरे हुरमत (प्रतिष्ठा) वाले घर के पास (7)
(7) यानी इस वादी में जहाँ अब मक्कए मुकर्रमा है. जुर्रियत से मुराद हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम हैं. आप शाम प्रदेश में हज़रत हाजिरा की मुबारक कोख़ से पैदा हुए. हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की बीवी हज़रत सारा के कोई औलाद न थी इस वजह से उन्हें ईषर्या पैदा हुई और उन्होंने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से कहा कि आप हाजरा और उनके बेटे को मेरे सामने से हटा दीजिये. अल्लाह की हिकमत ने यह एक कारण पैदा किया था. चुनांचे वही आई कि आप हाजिरा व इस्माईल को उस धरती में ले जाएं (जहाँ अब मक्कए मुकर्रमा है). आप उन दोनो को अपने साथ बुराक़ पर सवार करके शाम से सरज़मीने हरम में लाए और काबए मुक़द्दसा के पास उतारा. यहाँ उस वक़्त न कोई आबादी थी, न कोई चश्मा, न पानी. एक तोशादान में खजूरें और एक बर्तन में पानी उन्हें देकर आप वापस हुए. हज़रत हाजिरा ने अर्ज़ किया कि आप कहाँ जाते हैं और हमें इस घाटी में बेसहारा छोडे जाते हैं. लेकिन आपने इसका कोई जवाब नहीं दिया और उनकी तरफ़ नज़र न की. हज़रत हाजिरा ने कई बार यह अर्ज़ किया और जवाब न पाया तो कहा कि क्या अल्लाह ने आपको इसका हुक्म दिया है. आपने फ़रमाया हाँ. उस वक़्त उन्हें इत्मीनान हुआ. हज़रत इब्राहीम चले गए और उन्होंने अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर यह दुआ की जो आयत में बयान की गई है. हज़रत हाजिरा अपने बेटे हज़रत इस्माईल  अलैहिस्सलाम को दूध पिलाने लगीं. जब वह पानी ख़त्म हो गया और प्यास की सख़्ती हुई और साहबज़ादे का गला भी प्यास से सूख गया तो आप पानी की तलाश में सफ़ा और मर्वा के बीच दौड़ीं. ऐसा सात बार हुआ. यहाँ तक कि फ़रिश्ते के पर मारने से या हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम के मुबारक क़दम से इस सूखी ज़मीन में एक चश्मा (ज़मज़म) नमूदार हुआ. आयत में पाकी वाले घर से बैतुल्लाह मुराद है जो तूफ़ाने नूह से पहले काबए मुक़द्दसा की जगह था और तूफ़ान के वक़्त आसमान पर उठा लिया गया था. हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का यह वाक़िआ आपके आग में डाले जाने के बाद हुआ. आग के वाक़ए में आपने दुआ न फ़रमाई थी और इस वाक़ए में दुआ भी की और गिड़गिड़ाए भी. अल्लाह तआला की कारसाज़ी पर भरोसा करके दुआ न करना भी तवक्कुल और बेहतर है लेकिन दुआ का मक़ाम उससे भी अफ़ज़ल है. तो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का इस वाक़ए के आख़िर में दुआ फ़रमाना इसलिये है कि आप कमाल के ज़ीने पर दम बदम तरक़्क़ी पर हैं.

ऐ हमारे रब इसलिये कि वो (8)
(8) यानी इस्माईल और उनकी औलाद इस वीरान घाटी में तेरे ज़िक्र और इबादत में मश्ग़ूल हों और तेरे बैतुल हराम के पास.

नमाज़ क़ायम रखें तो तू लोगों के कुछ दिल उनकी तरफ़ माइल करदे(9)
(9) दूसरे स्थानों से यहाँ आएं और उनके दिल इस पाक मकान के दर्शन के शौक़ में खिंचें. इसमें ईमानदारों के लिये यह दुआ है कि उन्हें बैतुल्लाह का हज नसीब हो और अपनी यहाँ रहने वाली सन्तान के लिये यह कि वो दर्शन के लिये आने वालों से फ़ायदा उठाते रहें. गरज़ यह दुआ दीन और दुनिया की बरकतों पर आधारित है. हज़रत की दुआ क़ुबूल हुई. कबीलए जुरहुम ने इस तरफ़ से गुज़रते हुए एक पक्षी देखा तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि बयाबान में पक्षी कैसा. शायद कहीं चश्मा निकला. तलाश की तो देखा कि ज़मज़म शरीफ़ में पानी है. यह देखकर उन लोगों ने हज़रत हाजिरा से वहाँ बसने की इजाज़त चाही. उन्होंने इस शर्त पर इजाज़त दी कि पानी में तुम्हारा हक़ न होगा. वो लोग वहाँ बस गए. हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम जवाब हुए तो उन लोगों ने आपकी पाकी और तक़वा देखकर अपने ख़ानदान में आपकी शादी कर दी. कुछ अरसा बाद हज़रत हाजिरा का इन्तिक़ाल हो गया. इस तरह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की यह दुआ पूरी हुई और आपने दुआ में यह भी फ़रमाया.

और उन्हें कुछ फल खाने को दे(10)
(10) उसी का फल है कि कई तरह की फ़सलें रबी व ख़रीफ़ वग़ैरह के मेवे वहाँ एक ही वक़्त में मौजूद मिलते हैं.

शायद वो एहसान मानें {37} ऐ हमारे रब तू जानता है जो हम छुपाते है और जो ज़ाहिर करते, और अल्लाह पर कुछ छुपा नहीं, ज़मीन में और न आसमान में(11){38}
(11) हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने एक और बेटे की दुआ की थी. अल्लाह तआला ने क़ुबूल फ़रमाई तो आपने उसका शुक्र अदा किया और अल्लाह की बारगाह में अर्ज़ किया.

सब खुबियाँ अल्लाह को जिसने मुझे बुढ़ापे में इस्माईल व इस्हाक़ दिये बेशक मेरा रब दुआ सुनने वाला है{39} ऐ मेरे रब, मुझे नमाज़ का क़ायम करने वाला रख और कुछ मेरी औलाद को(12)
(12) क्योंकि कुछ के बारे में तो आपको अल्लाह के बताए से मालूम था कि काफ़िर होंगे इसलिये कुछ सन्तान के वास्ते नमाज़ों की पाबन्दी और सुरक्षा की दुआ की.

ऐ हमारे रब, मेरी दुआ सुन ले{40} ऐ हमारे रब मुझे बख़्श दे और मेरे माँ बाप को(13)
(13) ईमान की शर्त के साथ, या माँ बाप से हज़रत आदम और हव्वा मुराद हैं.

और सब मुसलमानों को जिस दिन हिसाब क़ायम होगा{41}

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सूरए – इब्राहीम -सातवाँ रूकू

सूरए   – इब्राहीम -सातवाँ रूकू

और हरगिज़ अल्लाह को बेख़बर न जानना ज़ालिमों के काम से(1)
(1) इसमें मज़लूम को तसल्ली दी गई कि अल्लाह तआला ज़ालिम से उसका बदला लेगा.

उन्हें ढील नहीं दे रहा है मगर ऐसे दिन के लिये जिसमें (2){42}
(2)हौल और दहशत से.

आंखे खुली की खुली रह जाएंगी, बेतहाशा दौड़ते निकलेंगे (3)
(3)हज़रत इस्राफ़ील अलैहिस्सलाम की तरफ़ जो उन्हें मेहशर के मैदान की तरफ़ बुलाएंगे.

अपने सर उठाए हुए कि उनकी पलक उनकी तरफ़ लौटती नहीं(4)
(4) कि अपने आप को देख सकें.

और उनके दिलों में कुछ सकत न होगी(5){43}
(5) आश्चर्य और दहशत की शिद्दत से. क़तादा ने कहा कि दिल सीनों से निकल कर गलो में आ फंसेंगे, न बाहर निकल सकेंगे न अपनी जगह वापस जा सकेंगे. मानी ये हें कि उस दिन हौल और दहशत की तीव्रता का यह आलम होगा कि सर ऊपर उठे होंगे, आँखे खुली की खुली रह जाएंगी. दिल अपनी जगह ठहर न पाएंगे.

और लोगों को इस दिन से डराओ(6)
(6) यानी काफ़िरों को क़यामत के दिन का ख़ौफ़ दिलाओ.

जब उनपर अज़ाब आएगा तो ज़ालिम  (7)
(7) यानी काफ़िर.

कहेंगे ऐ हमारे रब थोड़ी देर हमें (8)
(8) दुनिया में वापस भेज दे और.

मुहलत दे कि हम तेरा बुलाना मानें(9)
(9)और तेरे एक होने यानि तेरी तौहीद पर ईमान लाएं.

और रसूलों की ग़ुलामी करें(10)
(10) और हमसे जो क़ुसूर हो चुके उसकी तलाफ़ी करें. इसपर उन्हें फटकारा जाएगा और फ़रमाया जाएगा.

तो क्या तुम पहले(11)
(11) दुनिया में.

क़सम न खा चुके थे कि हमें दुनिया से कहीं हटकर जाना नहीं(12){44}
(12) और क्या तुमने मरने के बाद उठाए जाने और आख़िरत का इन्कार न किया था.

और तुम उनके घरों में बसे जिन्होंने अपना बुरा किया था (13)
(13) कुफ़्र और गुनाह करके, जैसे कि क़ौमे नूह व आद व समूद वग़ैरह.

और तुमपर ख़ूब खुल गया हमने उनके साथ कैसा किया(14)
(14) और तुमने अपनी आँखों से उनकी मंज़िलों में अज़ाब के निशान देखे और तुम्हें उनकी हलाकत और बर्बादी की ख़बरें मिलीं.

और हम ने तुम्हें मिसालें देकर बता दिया(15){45}
(15) ताकि तुम तदबीर न करो और समझो और अज़ाब और हलाकत से अपने आप को बचाओ.

और बेशक वो(16)
(16) इस्लाम को बचाने और कुफ़्र की सहायता करने के लिये नबीये अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के साथ.

अपना सा दाव चले(17)
(17)  कि उन्होंने रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के क़त्ल करने या क़ैद करने या निकाल देने का इरादा किया.

और उनका दाव अल्लाह के क़ाबू में है और उनका दाव कुछ ऐसा न था कि जिससे ये पहाड़ टल जाएं(18){46}
(18)यानी अल्लाह की आयतें और रसूल की शरीअत के अहकाम जो अपनी मज़बूती में अडिग पहाड़ों की तरह है, मुहाल है कि काफ़िरों के छल और उनकी बहाने बाज़ियों से अपनी जगह से टल सके.

तो हरगिज़ ख़याल न करना कि अल्लाह अपने रसूलों से वादा ख़िलाफ़ करेगा(19)
(19) यह तो सम्भव ही नहीं है. वह ज़रूर वादा पूरा करेगा और अपने रसूल की मदद फ़रमाएगा, उनके दीन को ग़ालिब करेगा. उनके दुश्मनों को हलाक करेगा.

बेशक अल्लाह ग़ालिब है बदला लेने वाला {47} जिस दिन (20)
(20) इस दिन से क़यामत का दिन मुराद है.

बदल दी जाएगी ज़मीन इस ज़मीन के सिवा और आसमान(21)
(21) ज़मीन और आसमान की तबदीली में मुफ़स्सिरों के दो क़ौल हैं, एक यह कि उनकी विशेषताएं बदल दी जाएंगी जैसे ज़मीन समतल हो जाएंगी, न उसपर पहाड़ बाक़ी रहेंगे, न ऊंचे टीले, न गहरे ग़ार, न दरख़्त, न इमारत, न किसी बस्ती और सल्तनत के निशान. आसमान पर कोई सितारा बाक़ी न रहेगा और सूरज चांद की रौशनियाँ ख़त्म हो जाएंगी. यह तबदीली विशेषताओ की है, ज़ात की नहीं. दूसरा क़ौल यह है कि आसमान और ज़मीन की ज़ात ही बदल दी जाएगी. इस ज़मीन की जगह एक दूसरी चांदी की ज़मीन होगी. सफ़ेद और साफ़, जिसपर न कभी ख़ून बहाया गया हो न गुनाह किया गया हो और आसमान सोने का होगा. यह दो क़ौल अगरचे आपस में अलग अलग मालूम होते हैं मगर इनमें से हर एक सही है. और जमा की वजह यह है कि पहले गुण बदले जाएंगे और दूसरी बार हिसाब के बाद दूसरा परिवर्तन होगा, उसमें ज़मीन और आसमान की ज़ाते ही बदल जाएंगी.

और लोग सब निकल खड़े होंगे(22)
(22)  अपनी क़ब्रो से.

एक अल्लाह के सामने जो सब पर ग़ालिब है {48}  और उस दिन तुम मुजरिमों(23)
(23) यानी काफ़िरों.

को देखोगे कि बेड़ियों में एक दूसरे से जुड़े होंगे(24){49}
(24) अपने शैतानों के साथ बन्धे हुए.

उनके कुर्ते राल के होंगे(25)
(25) काले रंग बदबूदार जिनसे आग के शोले और ज़्यादा तेज़ हो जाएं (मदारिक व ख़ाज़िन). तफ़सीरें  बैज़ावी में है कि उनके बदनों पर राल लीप दी जाएगी. वह कुर्ते की तरह हो जायगी. उसकी जलन और उसके रंग की वहशत और बदबू से तकलीफ़ पाएंगे.

और उनके चेहरे आग ढांप लेगी {50}  इसलिये कि अल्लाह हर जान को उसकी कमाई का बदला दे, बेशक अल्लाह को हिसाब करते कुछ देर नहीं लगती {51} यह (26)
(26) क़ुरआन शरीफ़.

लोगों को हुक्म पहुंचाना है और इसलिये कि वो उससे डराए जाएं और इसलिये कि वो जान लें कि वह एक ही मअबूद है(27)
(27) यानी इन आयतों से अल्लाह तआला की तौहीद की दलीलें पाएं.
और इसलिये कि अक़्ल वाले नसीहत मानें {52}