सूरए हूद – चौथा रूकू

सूरए  हूद – चौथा रूकू

और नूह को वही हुई कि तुम्हारी क़ौम से मुसलमान न होंगे मगर जितने ईमान ला चुके तो ग़म न खा उसपर जो वो करते हैं(1){36}
और किश्ती बनाओ हमारे सामने (2)
और हमारे हुक्म से और ज़ालिमों के बारे में मुझसे बात न करना (3)
वो ज़रूर डुबाए जाएंगे(4){37}
और नूह किश्ती बनाता है, और जब उसकी क़ौम के सरदार उसपर गुज़रते उसपर हंसते (5)
बोले अगर तुम हम पर हंसते हो तो एक वक़्त हम तुमपर हंसेगे(6)
जैसा तुम हंसते हो (7){38}
तो अब जान जाओगे किसपर आता है वह अज़ाब कि उसे रुसवा करे (8)
और उतरता है वह अज़ाब जो हमेशा रहे (9){39}
यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म आया (10)
और तनूर उबला (11)
हमने फ़रमाया किश्ती में सवार करले हर जिन्स(नस्ल)में से एक जोड़ा नर और मादा और जिनपर बात पड़ चुकी है(12)
उनके सिवा अपने घरवालों और बाक़ी मुसलमानों को और उसके साथ मुसलमान न थे मगर थोड़े(13){40}
और बोला इसमें सवार हो (14)
अल्लाह के नाम पर इसका चलना और इसका ठहरना (15)
बेशक मेरा रब ज़रूर बख़्शने वाला मेहरबान है {41} और वह उन्हें लिये जा रही है ऐसी मौजों में जैसे पहाड़ (16)
और नूह ने अपने बेटे को पुकारा और वह उससे किनारे था(17)
ऐ मेरे बच्चे हमारे साथ सवार हो जा और काफ़िरों के साथ न हो (18){42}
बोला अब मैं किसी पहाड़ की पनाह लेता हूँ वह मुझे पानी से बचा लेगा, कहा आज अल्लाह के अज़ाब से कोई बचाने वाला नहीं मगर जिसपर वह रहम करे, और उनके बीच में मौज आड़े आई तो वह डूबतों में रह गया(19){43}
और हुक्म फ़रमाया गया कि ऐ ज़मीन अपना पानी निगल ले और आसमान थम जा और पानी ख़ुश्क कर दिया गया और काम तमाम हुआ और किश्ती(20)
जूदी पहाड़ पर ठहरी (21)
और फ़रमाया गया कि दूर हों बे इन्साफ़ लोग {44} और नूह ने अपने रब को पुकारा अर्ज़ की ऐ मेरे रब मेरा बेटा भी तो मेरा घर वाला है (22)
और बेशक तेरा वादा सच्चा है और तू सबसे बढ़कर हुक्म वाला(23){45}
फ़रमाया ऐ नूह वह तेरे घरवालों में नहीं (24)
बेशक उसके काम बड़े नालायक़ हैं तो मुझ से वह बात न मांग जिसका तुझे इल्म नहीं(25)
मैं तुझे नसीहत फ़रमाता हूँ कि नादान न बन {46} अर्ज़ की ऐ मेरे रब मैं तेरी पनाह चाहता हूँ कि तुझसे वह चीज़ मांगू जिसका मुझे इल्म नहीं, और अगर तू मुझे न बख़्शे और रहम न करे तो मैं ज़ियाँकार (नुक़सान वाला) हो जाऊं{47} फ़रमाया गया ऐ नूह किश्ती से उतर हमारी तरफ़ से सलाम और बरकतों के साथ(26)
जो तुझपर है और तेरे साथ के कुछ गिरोहों पर (27)
और कुछ गिरोह हैं जिन्हें हम दुनिया बरतने देंगे(28)
फिर उन्हें हमारी तरफ़ से दर्दनाक अज़ाब पहुंचेगा(29){48}
ये ग़ैब की ख़बरें हम तुम्हारी तरफ़ वही (अल्लाह का कलाम) करते हैं (30)
इन्हें न तुम जानते थे न तुम्हारी क़ौम इस (31)
से पहले तो सब्र करो (32),
बेशक भला अंजाम परहेज़गारों का(33){49}

तफ़सीर
सूरए हूद – चौथा रूकू

(1) यानी कुफ़्र और आपको झुटलाना और आपको कष्ट देना, क्योंकि अब आपके दुश्मनों से बदला लेने का वक़्त आ गया.

(2)  हमारी हिफ़ाज़त में हमारी तालीम से.

(3)  यानी उनकी शफ़ाअत और अज़ाब दूर होने की दुआ न करना, क्योंकि उनका डूबना लिख दिया गया है.

(4) हदीस शरीफ़ में है कि हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म से साल के दरख़्त बोए. बीस साल में ये दरख़्त तैयार हुए. इस अर्से में कोई बच्चा पैदा न हुआ. इससे पहले जो बच्चे पैदा हो चुके थे वो बालिग़ हो गए और उन्होंने भी हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की दावत क़ुबूल करने से इन्कार कर दिया और हज़रत नूह किश्ती बनाने में मश्गू़ल हुए.

(5) और कहते ऐ नूह क्या कर रहे हो, आप फ़रमाते ऐसा मकान बनाता हूँ जो पानी पर चले. यह सुनकर हंसते, क्योंकि आप किश्ती जंगल में बनाते थे, जहाँ दूर दूर तक पानी न था. वो लोग मज़ाक उड़ाने के अन्दाज़ में यह भी कहते थे कि पहले तो आप नबी थे, अब बढ़ई हो गए.

(6)  तुम्हें हलाक होता देखकर.

(7) किश्ती देखकर. रिवायत है कि यह किश्ती दो साल में तैयार हुई. इसकी लम्बाई तीन सौ ग़ज़, चौड़ाई पचास गज़, ऊंचाई तीस गज़ थी, (इस में और भी कथन हैं) इस किश्ती में तीन दर्ज़े बनाए गए थे. निचले दर्जे में जानवर और दरिन्दे, बीच के तबक़े में चौपाए वग़ैरह, और ऊपर के तबक़े में ख़ुद हज़रत नूह अलैहिस्सलाम और आपके साथी और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का जसदे मुबारक, जो औरतों और मर्दों के बीच हायल था, और ख़ाने का सामान था. पक्षी भी ऊपर के ही तबक़े में थे. (खाज़िन व मदारिक)

(8) दुनिया में और डूबने का अज़ाब है.

(9) यानी आख़िरत का अज़ाब.

(10) अज़ाब व हलाकत का.

(11) और पानी ने इसमें से जोश मारा. तन्दूर से, या ज़मीन का ऊपरी हिस्सा मुराद है, या यही तन्दुर जिसमें रोटी पकाई जाती है. इसमें भी कुछ क़ौल हैं. एक यह है कि वह तन्दूर पत्थर का था, हज़रत हव्वा का, जो आपको तर्के में पहुंचा था, और वह या शाम में था, या हिन्द में. तन्दूर का जोश मारना अज़ाब आने की निशानी थी.

(12) यानी उनके हलाक का हुक्म हो चुका है. और उन से मुराद आपकी बीबी वाइला जो ईमान न लाई थी और आपका बेटा कनआन है. चुनांचे हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने उन सबको सवार किया. जानवर आपके पास आते थे और आपका दायाँ हाथ नर पर और बायां मादा पर पड़ता था और आप सवार करते जाते थे.

(13) मक़ातिल ने कहा कि कुल मर्द औरत बहत्तर थे. इसमें और कथन भी है. सही संख्या अल्लाह जानता है. उनकी तादाद और किसी सही हदीस में नहीं आई है.

(14) यह कहते हुए कि…..

(15) इसमें तालीम है कि बन्दे को चाहिये जब कोई काम करना चाहे तो बिस्मिल्लाह पढ़कर शुरू करे ताकि उस काम में बरकत हो और वह भलाई का कारण बने. ज़िहाक ने कहा कि जब हज़रत नूह अलैहिस्सलाम चाहते थे कि किश्ती चले तो बिस्मिल्लाह फ़रमाते थे. किश्ती चलने लगती थी, और जब चाहते थे कि ठहर जाए, बिस्मिल्लाह फ़रमाते थे, ठहर जाती थी.

(16) चालीस दिन रात आसमान से वर्षा होती रही और ज़मीन से पानी उबलता रहा, यहाँ तक कि सारे पहाड़ डूब गए.

(17) यानी हज़रत नूह अलैहिस्सलाम से अलग था, आपके साथ सवार न हुआ था.

(18) कि हलाक हो जाएगा. यह लड़का दोग़ली प्रवृति का था. अपने बाप पर खुद को मुसलमान ज़ाहिर करता था और अन्दर अन्दर काफ़िरों के साथ मिला हुआ था. (हुसैनी)

(19) जब तुफ़ान अपनी चरम सीमा पर पहुंचा और काफ़िर डूब चुके तो अल्लाह का हुक्म आया.

(20) छ: महीने सारी धरती की परिक्रमा यानी तवाफ़ करके.

(21) जो मूसल या शाम की सीमाओ में स्थित है. हज़रत नूह अलैहिस्सलाम किश्ती में दसवीं रजब को बैठे और दसवीं मुहर्रम को किश्ती जूदी पहाड़ पर ठहरी. तो आपने उसके शुक्र का रोज़ा रखा और अपने साथियों को भी रोज़े का हुक्म फ़रमाया.

(22) और तूने मुझ से मेरे और मेरे घर वालों की निजात का वादा फ़रमाया.

(23) तो इसमें क्या हिकमत है. शैख अबू मन्सूर मातुरीदी रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया कि हज़रत नूह अलैहिस्सलाम का बेटा कनआन मुनाफ़िक़ था और आपके सामने ख़ुद को ईमान वाला ज़ाहिर करता था. अगर वह अपना कुफ़्र ज़ाहिर कर देता तो अल्लाह तआला से उसकी निजात की दुआ न करते. (मदारिक)

(24) इससे साबित हुआ कि नसब के रिश्ते से दीन का रिश्ता ज़्यादा मज़बूत है.

(25) कि वह मांगने के क़ाबिल है या नहीं.

(26) इन बरकतों से आपकी सन्तान और आपके अनुयाइयों की कसरत और बहुतात मुराद है कि बहुत से नबी और दीन के इमाम आपकी पाक नस्ल से हुए. उनकी निस्बत फ़रमाया कि ये बरकतें………

(27) मुहम्मद बिन कअब खुज़ाई ने कहा कि इन गिरोहो में क़यामत तक होने वाला हर मूमिन दाख़िल है.

(28) इससे हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के बाद पैदा होने वाले काफ़िर गिरोह मुराद है जिन्हें अल्लाह तआला उनकी मीआदों तक फ़राख़ी, ऐश और रिज़्क़ में बहुतात अता फ़रमाएगा.

(29) आख़िरत में.

(30) ये सम्बोधन सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को फ़रमाया.

(31) ख़बर देने.

(32) अपनी क़ौम की तकलीफ़ों पर, जैसा कि नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम की तकलीफ़ों पर सब्र किया.

(33) कि दुनिया में कामयाब और विजयी और आख़िरत में इनाम और अच्छा बदला पाए हुए.

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