सूरए तौबह – छटा रूकू

सूरए तौबह – छटा रूकू

ऐ ईमान वालों तुम्हें क्या हुआ जब तुम से कहा जाए कि ख़ुदा की राह में कूच करो तो बोझ के मारे ज़मीन में बैठ जाते हो (1)
क्या तुमने दुनिया की ज़िन्दगी आख़िरत के बदले पसन्द कर ली और जीती दुनिया का असबाब आख़िरत के सामने नहीं मगर थोड़ा(2) {38}
अगर न कूच करोगे तो (3)
तुम्हें सख़्त सज़ा देगा और तुम्हारी जगह और लोग ले आएगा (4)
और तुम उसका कुछ न बिगाड़ सकोगे, और अल्लाह सब कुछ कर सकता है {39} अगर तुम मेहबूब की मदद न करो तो बेशक अल्लाह ने उनकी मदद फ़रमाई जब काफ़िरों की शरारत से उन्हें बाहर तशरीफ़ लेजाना हुआ(5)
सिर्फ़ दो जान से जब वो दानों (6)
ग़ार में थे जब अपने यार से (7)
फ़रमाते थे ग़म न खा बेशक अल्लाह हमारे साथ है तो अल्लाह ने उसपर अपना सकीना उतारा (8)
और उन फ़ौजों से उसकी मदद की जो तुमने न देखीं (9)
और काफ़िरों की बात नीचे डाली (10)
अल्लाह ही का बोल बाला है, और अल्लाह ग़ालिब हिकमत वाला है {40} कूच करो हलकी जान से चाहे भारी दिल से (11)
और अल्लाह की राह में लड़ों अपने माल व जान से यह तुम्हारे लिये बेहरत है अगर जानों (12) {41}
अगर कोई क़रीब माल या मुतवस्सित (दरमियानी) सफ़र होता (13)
तो ज़रूर तुम्हारे साथ जाते (14)
मगर उनपर तो मशक्क़त (मेहनत) का रास्ता दूर पड़ गया और अब अल्लाह की क़सम खाएंगे (15)
कि हमसे बन पड़ता तो ज़रूर तुम्हारे साथ चलते, (16)
अपनी जानों को हलाक करते हैं (17)
और अल्लाह जानता है कि वो बेशक ज़रूर झूटे हैं {42}

तफ़सीर
सूरए तौबह – छटा रूकू

(1) और सफ़र से घबराते हो. यह आयत ग़जवए तबूक की तरग़ीब में नाज़िल हुई. तबूक एक जगह है शाम के आस पास, मदीनए तैय्यिबह से चौदह मंज़िल दूरी पर. रजब सन नौ हिजरी में ताइफ़ से वापसी के बाद सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को ख़बर पहुंची कि अरब के ईसाईयों की तहरीक और प्रेरणा से हरक़ल रूएम के बादशाह ने रूएमियों और शामियों का एक भारी लश्कर तैयार किया है और वह मुसलमानों पर हमले का इरादा रखता है. तो हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने मुसलमानों को जिहाद का हुक्म दिया. यह ज़माना अत्यन्त तंगी, दुष्काल और सख़्त गर्मी का था. यहाँ तक कि दो दो आदमी एक एक खजूर पर बसर करते थे. सफ़र दूर का था. दुश्मन बड़ी तादाद में और मज़बूत थे. इसलिये कुछ क़बीले बैठ रहे और उन्हें उस वक़्त जिहाद में जाना भारी मालूम हुआ. इस ग़ज़वे में बहुत से मुनाफ़िक़ों का पर्दा फ़ाश और हाल ज़ाहिर हो गया. हज़रत उस्मान गनी रदियल्लाहो अन्हो ने इस ग़ज़वे में बड़ा दिल खोल कर ख़र्च किया. दस हज़ार मुजाहिदों को सामान दिया और दस हज़ार दीनार इस ग़ज़वे पर ख़र्च किये. नौ सौ ऊंट और सौ घोड़े साज़ सामान समेत इसके अलावा हैं. और सहाबा ने भी ख़ूब ख़र्च किया. उनमें सबसे पहले हज़रत अबूबक्र सिद्दीक रदियल्लाहो अन्हो हैं जिन्हों ने अपना कुल माल हाज़िर कर दिया, जिसकी मिक़दार चार हज़ार दिरहम थी. और हज़रत उमर रदियल्लाहो अन्हो ने अपना आधा माल हाज़िर किया. सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम तीस हज़ार की लश्कर लेकर रवाना हुए. हज़रत अली मुर्तज़ा रदियल्लाहो अन्हो को मदीनए तैय्यिबह में छोड़ा. अब्दुल्लाह बिन उबई और उसके साथी मुनाफ़िक़ सनीयतुल वदाअ तक साथ चलकर रह गए. जब इस्लामी लश्कर तबूक में उतरा तो उन्होंने देखा कि चश्मे में पानी बहुत थोड़ा है. रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उसके पानी से उसमें कुल्ली फ़रमाई जिसकी बरकत से पानी जोश में आया और चश्मा भर गया. लश्कर और उसके सारे जानवर अच्छी तरह सैराब हुए. हज़रत ने काफ़ी अरसा यहाँ क़याम फ़रमाया. हरक़ल अपने दिल में आपको सच्चा नबी जानता था, इसलिये उसे डर हुआ और उसने आप से मुक़ाबला न किया. हज़रत ने आस पास के इलाक़ों में लश्कर भेजे. चुनांचे हज़रत ख़ालिद को चार सौ से ज़्यादा सवारों के साथ दोम्मतुल जुन्दल के हाकिम अकीदर के मुक़ाबिल भेजा और फ़रमाया कि तुम उसको नील गाय के शिकार में पकड़ लो. चुनांचे ऐसा ही हुआ. जब वह नील गाय के शिकार के लिये क़िले से उतरा तो हज़रत ख़ालिद बिन वलीद रदियल्लाहो अन्हो उसको गिरफ़्तार करके हुज़ूर की ख़िदमत में लाए. हुज़ूर ने जिज़िया मुक़र्रर फ़रमाकर उसको छोड़ दिया. इसी तरह ईला के हाकिम पर इस्लाम पेश किया और जिज़िया पर सुलह फ़रमाई. वापसी के वक़्त जब हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम मदीने के क़रीब तशरीफ़ लाए तो जो लोग जिहाद में साथ होने से रह गए थे, वो हाज़िर हुए. हुज़ूर ने सहाबा से फ़रमाया कि उनमें से किसी से कलाम न करें और अपने पास न बिठाएं जब तक हम इजाज़त न दें. तो मुसलमानों ने उनसे मुंह फेर लिया, यहाँ तक कि बाप और भाई की तरफ़ भी तवज्जह न की. इसी बारे में ये आयतें उतरीं.

(2) कि दुनिया और उसकी सारी माया नश्वर है और आख़िरत और उसकी सारी नेअमतें बाक़ी रहने वाली हैं.

(3) ऐ मुसलमानों, रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के हुक्म के मुताबिक़ अल्लाह तआला.

(4) जो तुम से बेहतर और फ़रमाँबरदारी होंगे. तात्पर्य यह है कि अल्लाह तआला अपने नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की विजय और उनके दीन को इज़्ज़त देने का ख़ुद ज़िम्मेदार है. तो अगर तुम रसूल की आज्ञा का पालन करने में जल्दी करोगे तो यह सआदत तुम्हें नसीब होगी और अगर तुमने सुस्ती की तो अल्लाह तआला दूसरों को अपने नबी की ख़िदमत की नेअमत से नवाज़ेगा.

(5) यानी हिजरत के वक़्त मक्कए मुकर्रमा से, जबकि काफ़िरों ने कमेटी घर में हुज़ूर के क़त्ल और क़ैद वग़ैरह के बुरे बुरे मशवरे किये थे.

(6) सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम और हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रदियल्लाहो अन्हो.

(7) यानी सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम हज़रत सिद्दीक़ अकबर रदियल्लाहो रदियल्लाहो अन्हो से. हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ रदियल्लाहो अन्हो का सहाबी होना इस आयत से साबित है. हसन बिन फ़ज़्ल ने फ़रमाया जो शख़्स हज़रत अबूबक्र सिद्दीक़ के सहाबी होने का इनकार करे वह क़ुरआनी आयत का इन्कारी होकर काफ़िर हुआ.

(8) और दिल को इतमीनान अता फ़रमाया.

(9) उनसे मुराद फ़रिश्तों की फ़ौज़ें हैं जिन्होंने काफ़िरों के मुंह फेर दिए और वो आपको देख न सके और बद्र व अहज़ाब व हुनैन में भी उन्ही ग़ैबी फ़ौज़ों से मदद फ़रमाई.

(10) कुफ़्र और शिर्क की दावत को पस्त फ़रमाया.

(11) यानी ख़ुशी से या भारी दिल से. और एक क़ौल यह है कि क़ुव्वत के साथ, या कमज़ोरी के साथ और बे सामानी से या भरपूर साधनों के साथ.

(12) कि जिहाद का सवाब बैठ रहने से बेहतर है. तो मुस्तइदी के साथ तैयार हो और आलस्य न करो.

(13) और दुनियावी नफ़े की उम्मीद होती और सख़्त मेहनत और मशक़्क़त का अन्देशा न होता.

(14) यह आयत उन मुनाफ़िक़ों की शान में उतरी जिन्होंने ग़ज़वए तबूक में जाने से हिचकिचाहट दिखाई थी.

(15) ये मुनाफ़िक़ और इस तरह विवशता दिखाएंगे.

(16) मुनाफ़िक़ों की इस विवशता और बहाने बाज़ी से पहले ख़बर दे देना ग़ैबी ख़बर और नबुव्वत की दलीलों में से है, चुनांचे जैसा फ़रमाया था वैसा ही पेश आया और उन्होंने यही बहाने बाज़ी की और झूठी क़समें खाई.

(17) झूठी क़सम खाकर. इस आयत से साबित हुआ कि झूठी क़सम खाना हलाकत का कारण है.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: