8- सूरए अनफ़ाल – सातवाँ रूकू

8- सूरए अनफ़ाल – सातवाँ रूकू

जब कहते थे मुनाफ़िक़ (1)
और वो जिनके दिलों में आज़ार है (2)
कि ये मुसलमान अपने दीन पर घमण्डी हैं (3)
और जो अल्लाह पर भरोसा करे (4)
तो बेशक अल्लाह (5)
ग़ालिब हिकमत वाला है {49} और कभी तू देखे जब फ़रिश्ते काफ़िरों की जान निकालते है मगर रहे हैं उनके मुंह और उनकी पीठ पर(6),
और चखो आग का अज़ाब {50} यह (7)
बदला है उसका जो तुम्हारे हाथों ने आगे भेजा (8)
और अल्लाह बन्दों पर ज़ुल्म नहीं करता(9){51}
जैसे फ़िरऔन वालों और उनसे अगलों का तरीक़ा (10),
वो अल्लाह की आयतों से इन्कारी हुए तो अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों पर पकड़ा, बेशक अल्लाह क़ुव्वत वाला सख़्त अज़ाब वाला है{52} यह इसलिये कि अल्लाह किसी क़ौम से जो नेअमत उन्हें दी थी बदलता नहीं जब तक वो ख़ुद न बदल जाएं (11)
और बेशक अल्लाह सुनता जानता है {53} जेसे फ़िरऔन वालों और उनसे अगलों का तरीक़ा, उन्होंने अपने रबकी आयतें झुटलाई तो हमने उनको उनके गुनाहों के कारण हलाक किया और हमने फ़िरऔन वालों को डुबो दिया (12)
और वो सब ज़ालिम थे (54) बेशक सब जानवरों में बदतर अल्लाह के नज़दीक वो हैं जिन्होंने कुफ़्र किया और ईमान नहीं लाते {55} वो जिन से तुमने मुआहिदा {समझौता} किया था फिर हर बार अपना एहद तोड़ देते हैं (13)
और डरते नहीं (14){56}
तो अगर तुम उन्हें कहीं लड़ाई में पाओ तो उन्हें ऐसा क़त्ल करो जिससे उनके बचे हुओ को भगाओ (15)
इस उम्मीद पर कि शायद उन्हें इबरत (सीख) हो (16){57}
और अगर तुम किसी क़ौम से दग़ा का डर करो (17)
तो उनका एहद उनकी तरफ़ फैंक दो बराबरी पर (18)
बेशक दग़ा वाले अल्लाह को पसन्द नहीं {58}

तफ़सीर सूरए अनफ़ाल -सातवाँ रूकू

(1) मदीने के.

(2) ये मक्कए मुकर्रमा के कुछ लोग थे जिन्होंने कलिमा तो पढ़ लिया था मगर अभी तक उनके दिलों में शक शुबह बाक़ी था. जब क़ुरैश के काफ़िर सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से जंग के लिये निकले, यह भी उनके साथ बद्र में पहुंचे. वहाँ जाकर मुसलमानों को कम तादाद में देखा तो शक और बढ़ा और मुर्तद हो गए और कहने लगे.

(3)  कि अपनी कम संख्या के बावजूद ऐसे भारी लश्कर के मुक़ाबले में आ गए. अल्लाह तआला फ़रमाता है.

(4) और अपना काम उसके सुपुर्द करदे और उसके फ़ज़्ल और एहसान पर संतुष्ट हो.

(5) उसका हाफ़िज़ और नासिर है.

(6) लोहे के गदा जो आग में लाल किये हुए हों और उनसे जो ज़ख्म लगता है उससे आग पड़ती है और जलन होती है. उनसे मारकर फ़रिश्ते काफ़िरों से कहते हैं.

(7) मुसीबत और अज़ाब.

(8) यानी जो तुमने कमाया, कुफ़्र और गुनाह.

(9) किसी पर बेजुर्म अज़ाब नहीं करता और काफ़िर पर अज़ाब करना इन्साफ़ है.

(10) यानी इन काफ़िरों की आदत कुफ़्र और सरकशी में फ़िरऔनी और उनसे पहलों जैसी है. तो जिस तरह वो हलाक किये गए, ये भी बद्र के दिन क़त्ल और क़ैद में मुब्तिला किये गए. हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया कि जिस तरह फ़िरऔनियों ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की नबुव्वत को यक़ीन जानकर उनको झुटलाया, यही हाल इन लोगों का है कि रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की रिसालत को जान पहचान कर झुटलाते हैं.

(11) और अधिक बदतर हाल में मुब्तिला न हों जैसे कि अल्लाह तआला ने मक्के के काफ़िरों को रोज़ी देकर भूख की तकलीफ़ दूर की, अम्न देकर ख़ौफ़ से निजात दिलाई और उनकी तरफ़ अपने हबीब सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को नबी बनाकर भेजा. उन्होंने इन नेअमतों पर शुक्र तो न किया, उल्टे यह सरकशी की कि नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को झुटलाया, उनका ख़ून बहाने पर उतारू हुए और लोगों को अल्लाह की राह से रोका. सदी का क़ौल है कि अल्लाह की नेअमत सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम हैं.

(12) ऐसे ही ये क़ुरैश के काफ़िर हैं जिन्हें बद्र में हलाक किया गया.

(13) इब्न शर्रद दवाब्बे और इसके बाद की आयतें बनी क़ुरैज़ा के यहूदियों के बारे में नाज़िल हुई जिनका रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से एहद था कि वो आप से न लड़ेंगे न आपके दुशमनों की मदद करेंगे. उन्होंने एहद तोड़ा और मक्के के मुश्रिकों ने जब रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से जंग की तो उन्होंने हथियारों से उनकी मदद की फिर हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से मअज़िरत की कि हम भूल गए थे और हमसे ग़लती हो गई. फिर दोबारा एहद किया और उसको भी तोड़ा. अल्लाह तआला ने उन्हें सब जानवरों से बदतर बताया क्योंकि काफ़िर सब जानवरों से बदतर हैं और कुफ़्र के साथ साथ एहद तोड़ने वाले भी हों तो और भी ख़राब.

(14) अल्लाह से, एहद तोड़ने के ख़राब नतीजे से, और न इससे शरमाते हैं जब कि एहद तोड़ना हर समझ बूझ वाले के लिये शर्मनाक जुर्म है और एहद तोड़ने वाला सबके नज़दीक बे एतिबार हो जाता है. जब उनकी बेग़ैरती इस दर्जे़ पहुंच गई तो यक़ीनन वो जानवरों से बदतर हैं.

(15) और उनकी हिम्मतें तोड़ दो और उनकी जमाअतों को मुन्तशिर कर दो.

(16) और वो नसीहत क़ुबूल करें.

(17) और ऐसी संभावनाएं पाई जाएं जिनसे साबित हो कि वो उज़ूर करेंगे और एहद पर क़ायम न रहेंगे.

(18) यानी उन्हें इस एहद की मुख़ालिफ़त करने से पहले आगाह कर दो कि तुम्हारी बद एहदी के निशान पाए गए इस लिये वह एहद ऐतिबार के क़ाबिल न रहा, उसकी पाबन्दी न की जाएगी.

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