सूरए अनआम – चौथा रूकू

सूरए अनआम – चौथा रूकू
अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला

बेशक हार में रहे वो जिन्होंने अपने रब से मिलने से इन्कार किया यहां तक कि जब उनपर क़यामत अचानक आ गई बोले हाय अफ़सोस हमारा इसपर कि इसके मानने में हमने चूक की और वो अपने (1)
बोझ अपनी पीठ पर लादे हुए हैं और कितना बुरा बोझ उठाए हुए हैं (2) {31}
और दुनिया की ज़िन्दगी नहीं मगर खेल कूद (3)
और बेशक पिछला घर भला उनके लिये जो डरते हैं (4)
तो क्या तुम्हें समझ नहीं {32} हमें मालूम है कि तुम्हें रंज देती है वह बात जो ये कह रहे हैं (5)
तो वो तुम्हें नहीं झुटलाते बल्कि ज़ालिम अल्लाह की आयतों से इन्कार करते हैं {33} और तुम से पहले झुटलाए गए तो उन्होंने सब्र किया इस झुटलाने  और ईज़ाएं (पीड़ाएं) पाने पर यहां तक कि उन्हें हमारी मदद आई (6)
और अल्लाह की बातें बदलने वाला कोई नहीं (7)
और तुम्हारे पास रसूलों की ख़बरें आही चुकी हैं (8) {34}
और अगर उनका मुंह फेरना तुमको बुरा लगा है (10)
तो अगर तुम से हो सके तो ज़मीन में कोई सुरंग तलाश करलो या आसमान में कोई ज़ीना फिर उन के लिये निशानी ले आओ (11)
और अल्लाह चाहता तो उन्हें हिदायत पर इकट्ठा कर देता तो ऐ सुनने वाले तू हरग़िज़ नादान न बन {35} मानते तो वही हैं जो सुनते हैं (12)
और उन मुर्दा दिलों (13)
को अल्लाह उठाएगा (14)
फिर उसकी तरफ़ हांके जाएंगे (15) {36}
और बोले (16)
उनपर कोई निशानी क्यों न उतरी उनके रब की तरफ़ से (17)
तुम फ़रमाओ कि अल्लाह क़ादिर है कि कोई निशानी उतारे लेकिन उनमें बहुत निरे जाहिल हैं (18) {37}
और नहीं कोई ज़मीन में चलने वाला और न कोई परिन्दा कि अपने परों पर उड़ता है मगर तुम जैसी उम्मतें (19)
हमने इस किताब में कुछ उठा न रखा (20)
फिर अपने रब की तरफ़ उठाए जाएंगे (22) {38}
और जिन्हों ने हमारी आयतें झुटलाईं बेहरे और गूंगे हैं (23)
अंधेरों में (24)
अल्लाह जिसे चाहे गुमराह करे और जिसे चाहे सीधे रास्ते डाल दे (25) {39}
तुम फ़रमाओ भला बताओ तो अगर तुमपर अल्लाह का अज़ाब आए या क़यामत क़ायम हो क्या अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे(26)
अगर सच्चे हो (27) {40}
बल्कि उसी को पुकारोगे तो वह अगर चाहे (28)
जिस पर उसे पुकारते हो उसे उठाले और शरीकों को भूल जाओगे (29) {41}

तफ़सीर सूरए – अनआम – चौथा रूकू

(1) गुनाहों के.

(2) हदीस शरीफ़ में है कि काफ़िर जब अपनी क़ब्र से निकलेगा तो उसके सामने बहुत भयानक डरावनी और बहुत बदबूदार सूरत आएगी. वह काफ़िर से कहेगी तू मुझे पहचानता है. काफ़िर कहेगा, नहीं. तो वह काफ़िर से कहेगी, मैं तेरा ख़बीस अमल यानी कुकर्म हूँ. दुनिया में तू मुझपर सवार रहा, आज मैं तुझ पर सवार हूं और तुझे तमाम सृष्टि में रूस्वा करूंगा. फिर वह उसपर सवार हो जाता है.

(3) जिसे बक़ा अर्थात ठहराव नहीं, जल्द गुज़र जाती है, और नेकियाँ और फ़रमाँबरदारियाँ अगरचे मूमिन से दुनिया ही में हुई हों, लेकिन वो आख़िरत के कामों में से हैं.

(4) इससे साबित हुआ कि पाकबाज़ों और नेक लोगों के कर्मों के सिवा दुनिया में जो कुछ है, सब बुराई ही बुराई है.

(5) अख़नस बिन शरीक़ और अबू जहल की आपसी मुलाक़ात हुई तो अख़नस ने अबू जहल से कहा, ऐ अबुल हिकम (काफ़िर अबू जहल को यही पुकारते थे) यह एकान्त की जगह है और यहाँ कोई ऐसा नहीं जो मेरी तेरी बात पर सूचित हो सके. अबू तू मुझे ठीक ठीक बता कि मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) सच्चे हैं या नहीं. अबू जहल ने कहा कि अल्लाह की क़सम, मुहम्मद बेशक सच्चे हैं, कभी कोई झूटी बात उनकी ज़बान पर न आई, मगर बात यह है कि ये क़ुसई की औलाद हैं और लिवा (झंडा), सिक़ायत (पानी पिलाना), हिजाबत, नदवा वग़ैरह, तो सारे सत्कार उन्हें हासिल ही हैं, नबुव्वत भी उन्हीं में हो जाए तो बाक़ी क़ुरैशियों के लिये सम्मान क्या रह गया. तिरमिज़ी ने हज़रत अली रदियल्लाहो अन्हो से रिवायत की कि अबू जहल ने हज़रत सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से कहा, हम आपको नहीं झुटलाते, हम तो उस किताब को झुटलाते हैं जो आप लाए. इस पर यह आयत उतरी.

(6) इसमें सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की तसल्ली है कि क़ौम हुज़ूर की सच्चाई का विश्वास रखती है लेकिन उनके ज़ाहिरी झुटलाने का कारण उनका हसद और दुश्मनी है.

(7) आयत के ये मानी भी होते हैं कि ऐ हबीब, आपका झुटलाया जाना अल्लाह की आयतों का झुटलाया जाना है और झुटलाने वाले ज़ालिम.

(8) और झुटलाने वाले हलाक कर दिये गए.

(9) उसके हुक्म को कोई पलट नहीं सकता. रसूलों की मदद और उनके झुटलाने वालों की हलाकत, उसने जिस समय लिख दी है, ज़रूर होगी.

(10) और आप जानते हैं कि उन्हें काफ़िरों से कैसी तकलीफ़ें पहुंची, ये नज़र के सामने रखकर आप दिल को इत्मीनान में रखें,.

(11) सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को बहुत इच्छा थी कि सब लोग इस्लाम ले आएं. जो इस्लाम से मेहरूम रहते, उनकी मेहरूमी आपको बहुत अखरती.

(12) मक़सद उनके ईमान की तरफ़ से रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की उम्मीद तोड़ना है, ताकि आपको उनके इन्कार करने और ईमान न लाने से दुख और तकलीफ़ न हो.

(13) दिल लगाकर समझने के लिये वही नसीहत क़ुबूल करते हैं और सच्चे दीन की दावत तसलीम करते हैं.

(14) याने काफ़िर लोग.

(15) क़यामत के दिन.

(16) और अपने कर्मों का बदला पाएंगे.

(17) मक्के के काफ़िर.

(18) काफ़िरों की गुमराही और सरकशी इस हद तक पहुंच गई कि वो कई निशानियों और चमत्कार, जो उन्होंने सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से देखे थे, उन पर भरोसा न किया और सबका इन्कार कर दिया और ऐसी आयत तलब करने लगे जिसके साथ अल्लाह का अज़ाब हो जैसा कि उन्होंने कहा था “अल्लाहुम्मा इन काना हाज़ा हुवल हक्क़ा मिन इन्दिका फ़-अमतिर अलैना हिजारतम मिनस समाए” यानी यारब अगर यह सत्य है तेरे पास से तो हम पर आसमान से पत्थर बरसा. (तफ़सीरे अबुसऊद),

(19) नहीं जानते कि इसका उतरना उनके लिये बला है कि इन्कार करते ही हलाक कर दिये जाएंगे.

(20) यानी तमाम जानदार चाहे वो मवेशी हों या जंगली जानवर या चिड़ियाँ, तुम्हारी तरह उम्मतें हैं. कुछ मुफ़स्सिरों ने फ़रमाया कि ये पशु पक्षी तुम्हारी तरह अल्लाह को पहचानते, एक मानते, उसकी तस्बीह पढ़ते, इबादत करते हैं. कुछ का कहना है कि वो मख़लूक़ होने में तुम्हारी तरह हैं. कुछ ने कहा कि वो इन्सान की तरह आपसी प्रेम रखते हैं और एक दूसरे की बात समझते हैं. कुछ का क़ौल है कि रोज़ी तलब करने, हलाकत से बचने, नर मादा की पहचान रखने में तुम्हारी तरह हैं. कुछ ने कहा पैदा होने, मरने, मरने के बाद हिसाब के लिये उठने में तुम्हारी तरह हैं.

(21) यानी सारे उलूम और तमाम “माकाना व मायकून” (यानी जो हुआ और जो होने वाला है) का इसमें बयान है और सारी चीज़ों की जानकारी इसमें है. इस किताब से या क़ुरआन शरीफ़ मुराद है या लौहे मेहफ़ूज़. (जुमल वग़ैरह)

(22) और तमाम जानदारों, पशु पक्षियों का हिसाब होगा. इसके बाद वो ख़ाक कर दिये जाएंगे.

(23) कि हक़ मानना और हक़ बोलना उन्हें हासिल नहीं.

(24) जिहालत और आशचर्य और कुफ़्र के.

(25) इस्लाम की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए.

(26) और जिनको दुनिया में मअबूद मनते थे, उनसे हाजत रवाई चाहोगे.

(27) अपने इस दावे में कि मआज़ल्लाह बुत मअबूद हैं, तो इस वक़्त उन्हें पुकारो मगर ऐसा न करोगे.

(28) तो इस मुसीबत को.

(29) जिन्हें अपने झूठे अक़ीदे में मअबूद जानते थे और उनकी तरफ़ नज़र भी न करोगे क्योंकि तुम्हें मालूम है कि वो तुम्हारे काम नहीं आ सकते.

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