सूरए आले इमरान – छटा रूकू

सूरए आले इमरान – छटा रूकू
अल्लाह के नाम से शुरु जो बहुत मेहरबान रहमत वाला,

याद करो जब अल्लाह ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं तुझे पूरी उम्र पहुंचाऊंगा (1)
और तुझे अपनी तरफ़ उठा लूंगा (2)
और तुझे काफ़िरों से पाक कर दूंगा और तेरे मानने वालों को (3)
क़यामत तक तेरा इन्कार करने वालों पर (4)
ग़लबा (आधिपत्य) दूंगा फिर तुम सब मेरी तरफ़ पलट कर आओगे तो मैं तुम में फै़सला फ़रमादूंगा जिस बात में झगड़ते हो (55) तो वो जो काफ़िर हूए मैं उन्हें दुनिया व आख़िरत में सख़्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा (56) और वो जो ईमान लाए और अच्छे काम किये अल्लाह उनका नेग उन्हें भरपूर देगा और ज़ालिम अल्लाह को नहीं भाते(57)
यह हम तुम पर पढ़ते हैं कुछ आयतें और हिक़मत (बोध) वाली नसीहत (58) ईसा की कहावत अल्लाह के नज़दीक आदम की तरह है (5)
उसे मनी से बनाया फिर फ़रमाया होजा वह फ़ौरन हो जाता है (59) ऐ सुनने वाले यह तेरे रब की तरफ़ से हक़ है तू शक वालों में न होना (60) फिर ऐ मेहबूब, जो तुम से ईसा के बारे में हुज्जत (बहस) करें बाद इसके कि तुम्हें इल्म आचुका तो उन से फ़रमादो आओ हम बुलाएं अपने बेटे और तुम्हारे बेटे, और अपनी औरतों और तुम्हारी औरतों  और अपनी जानें और तुम्हारी जानें फिर मुबाहिला करें तो झूटों पर अल्लाह की लानत डालें(6)(61)
यही बेशक सच्चा बयान है (7)
और अल्लाह के सिवा कोई मअबूद (पूजनीय) नहीं (8)
और बेशक अल्लाह ही ग़ालिब है हिकमत वाला (62)फिर अगर वो मुंह फेरें तो अल्लाह फ़सादियों को जानता है (63)

तफ़सीर :
सूरए आले इमरान – छटा रूकू
(1) यानी तुम्हें कुफ़्फ़ार क़त्ल न कर सकेंगे. (मदारिक वग़ैरह)

(2) आसमान पर बुज़ुर्गी और करामत का महल और फ़रिश्तों के रहने की जगह में बिना मौत के. हदीस शरीफ़ है कि सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया, हज़रत ईसा मेरी उम्मत पर ख़लीफ़ा होकर उतरेंगे, सलीब तोड़ेंगे, सुअरों को क़त्ल करेंगे, चालीस साल रहेंगे, निकाह फ़रमाएंगे, औलाद होगी, फिर आप का विसाल यानी देहान्त होगा. वह उम्मत कैसे हलाक हो जिसके अव्वल मैं हूँ और आख़िरत ईसा, और बीच में मेरे घर वालों में से. मुस्लिम शरीफ़ की हदीस में है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम दमिश्क़ में पूर्वी मिनारे पर उतरेंगे. यह भी आया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के मुबारक हुजरे में दफ़्न होंगे.

(3) यानी मुसलमानों को, जो आपकी नबुव्वत की तस्दीक़ करने वाले है.

(4) जो यहूदी है.

(5) नजरान के ईसाइयों का एक प्रतिनिधि मण्डल सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की ख़िदमत में आया और वो लोग हुज़ुर से कहने लगे आप गुमान करते हैं कि ईसा अल्लाह के बन्दे है. फ़रमाया हाँ, उसके बन्दे और उसके रसूल हैं और उसके कलिमे, जो कुंवारी बुतूल अज़रा की तरफ़ भेजे गए. ईसाई यह सुनकर बहुत ग़ुस्से में आए और कहने लगे, ऐ मुहम्मद, क्या तुमने कभी बे बाप का इन्सान देखा है. इससे उनका मतलब यह था कि वह ख़ुदा के बेटे है (अल्लाह की पनाह). इस पर यह आयत उतरी और यह बताया गया कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम सिर्फ़ बग़ैर बाप ही के हुए और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम तो माँ और आप दोनों के बग़ैर मिट्टी से पैदा किये गए तो जब उन्हें अल्लाह का पैदा किया हुआ मानते हो तो हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह का पैदा किया हुआ और उसका बन्दा मानने में क्या हिचकिचाहट और आशचर्य है.

(6) जब रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने नजरान के ईसाईयों को यह आयत पढ़कर सुनाई और मुबाहिले की दावत दी तो कहने लगे कि हम ग़ौर और सलाह करलें, कल आपको जवाब देंगे, जब वो जमा हुए तो उन्होंने अपने सबसे बड़े आलिम और सलाहकार व्यक्ति आक़िब से कहा ऐ अब्दुल मसीह, आपकी क्या राय है. उसने कहा तुम पहचान चुके हो कि मुहम्मद अल्लाह के भेजे हुए रसूल ज़रूर हैं. अगर तुमने उनसे मुबाहिला किया तो सब हलाक हो जाओगे. अब अगर ईसाइयत पर क़ायम रहना चाहते हो तो उन्हें छोड़ो और घर लौट चलो. यह सलाह होने के बाद वो रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुए तो उन्होंने देखा कि हुज़ूर की गोद में तो इमाम हुसैन हैं और दस्ते मुबारक में हसन का हाथ और फ़ातिमा और अली हुज़ूर के पीछे हैं (रदियल्लाहो अन्हुम) और हुज़ूर उन सब से फ़रमा रहे हैं कि जब मैं दुआ करूं तो तुम सब आमीन कहना. नजरान के सबसे बड़े आलिम (पादरी) ने जब इन हज़रात को देखा तो कहने लगा कि ऐ ईसाइयो, मैं ऐसे चेहरे देख रहा हूँ कि अगर ये लोग अल्लाह से पहाड़ को हटाने की दुआ करें तो अल्लाह पहाड़ को हटा दे. इनसे मुबाहिला न करना, हलाक हो जाओगे और क़यामत तक धरती पर कोई ईसाई बाक़ी न रहेगा. यह सुनकर ईसाइयों ने हुज़ूर की ख़िदमत में अर्ज़ किया कि मुबाहिले की तो हमारी राय नहीं है. अन्त में उन्होंने जिज़िया देना मन्ज़ूर किया मगर मुबाहिले के लिये तैयार न हुए. सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया, उसकी क़सम जिसके दस्ते क़ुदरत में मेरी जान है, नजरान वालों पर अज़ाब क़रीब ही आ चुका था, अगर वो मुबाहिला करते तो बन्दरों और सुअरों की सूरत में बिगाड़ दिये जाते और जंगल आग से भड़क उठता और नजरान और वहाँ की निवासी चिड़ियाँ तक नाबूद हो जातीं और एक साल के अर्से में सारे ईसाई हलाक हो जाते.

(7) कि हज़रत ईसा अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं और उनका वह हाल है जो ऊपर बयान हो चुका.

(8) इसमें ईसाइयों का भी रद है और सारे मुश्रिकों का भी.

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